नई दिल्ली। कोरोना लॉकडाउन के दौरान सड़कें सूनी पड़ी थीं और कामकाज ठप पड़ा था. सभी लोग कोविड-19 महामारी के डर में जी रहे थे. लॉकडाउन की वजह के हर क्षेत्र में आर्थिक नुकसान हुआ था, लेकिन इसके बीच प्रदूषण के मोर्चे पर लॉकडाउन एक वरदान साबित हुआ. सोशल मीडिया पर नीले आसमान और हिमालय दिखाने वाली तस्वीरें खूब वायरल हुईं. लेकिन, लॉकडाउन खत्म होते ही हालात एक बार फिर खराब हो गए हैं. दिल्ली-एनसीआर में एक्यूआई 600 के करीब पहुंच गया है. लोगों को सांस लेने तक में तकलीफ हो रही है. लॉकडाउन के दौरान नीला दिखने वाला आसमान अब धुंध की चादर में ढक गया है. कुछ इलाकों में हालात इतने खराब हो गए हैं कि पड़ोसी का फ्लैट भी नजर नहीं आ रहा है.लॉकडाउन और अब में PM10 का अंतर जानिए?
कोरोना लॉकडाउन के दौरान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर काफी नीचे चला गया था. उस दौरान पीएम10 का स्तर 100 से नीचे पहुंच गया था, वहीं पीएम 2.5 का स्तर भी 50 के करीब पहुंच गया था. लॉकडाउन की वजह से साल 2020 की पहली छमाही में पीएम 10 का औसत स्तर 158 और पीएम 2.5 का औसत स्तर 80 था. पिछले 1 सप्ताह से प्रदूषण में भारी बढ़ोतरी हुई है और AQI लगातार 500 के करीब बना हुआ है. पिछले 24 घंटे में दिल्ली (आनंद विहार) में पीएम2.5 का औसत 440 रहा है, जबकि पीएम10 का औस 423 रहा है जो बेहद गंभीर स्थिति में है.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को आनंद विहार स्टेशन पर पीएम 2.5 500 दर्ज किया गया जो ‘गंभीर’ श्रेणी में है. कार्बन मोनोऑक्साइड 115 पर और एनओ2 का स्तर 135 पर रहा, दोनों ‘मध्यम’ श्रेणी में रहा. बवाना में भी पीएम 2.5 का स्तर 500 पर पहुंच कर ‘गंभीर’ श्रेणी में आ गया, जबकि पीएम10 का स्तर 460 पर ‘गंभीर’ श्रेणी में रहा. कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर ‘मध्यम’ श्रेणी के तहत 123 पर दर्ज किया गया.
द्वारका सेक्टर 8 में पीएम10 का स्तर 486 और पीएम 2.5 का स्तर 493 दर्ज किया गया, जबकि कार्बन मोनोऑक्साइड 119 और एनओ2 का स्तर 132 पर मध्यम श्रेणी में था. आईजीआई एयरपोर्ट टी3 क्षेत्र में पीएम 2.5 का स्तर 471 और पीएम10 का स्तर 436 के साथ ‘गंभीर’ श्रेणी में था, जबकि कार्बन मोनोऑक्साइड 106 के साथ ‘मध्यम’ श्रेणी में पहुंच गया. आईटीओ पर पीएम 2.5 का स्तर 439 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में है. पीएम10 का स्तर 387 पर पहुंच गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है.्क्या होता है पीएम10 और पीएम2.5?प्रदूषण फैलाने में पीएम10 और पीएम2.5 ही सबसे बड़ा किरदार निभाते हैं और इसकी ही चर्चा सबसे ज्यादा होती है.
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि ये क्या हैं? पीएम यानी पर्टिकुलेट मैटर और पीएम10 के कणों का साइज 10 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास होता है. इसमें धूल और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं. वहीं पीएम2.5 कणों का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है. इसमें पराली जलाने और पटाखे से निकलने वाला धुंआ शामिल है.
पीएम2.5 बढ़ने पर ही धुंध बढ़ती है और विजिबिलिटी कम हो जाती है.का स्तर भी गिर जाता है.लॉकडाउन के दौरान क्यों कम हो गया था प्रदूषण?जब कोरोना वायरस को फैसले से रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया गया तो सड़कों पर रोजाना निकलने वाली लाखों गाड़ियों पर ब्रेक लग गया. उस दौरान सड़कों पर सिर्फ वही गाड़ियां दिखती थीं, जो जरूरी सेवाओं से जुड़ी थीं. इसके साथ ही लॉकडाउन के दौरान छोटी से लेकर बड़ी कंपनियों में भी गतिविधियां सीमित हो गई थीं.
