हिंदू पंचांग के अनुसार आज यानि 23 नवंबर को मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है और हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है. इस दिन पवित्र नदियों में, दान और तर्पण जैसे कार्य किए जाते हैं. कहते हैं जो लोग अमावस्या तिथि के दिन अपने पितरों का तर्पण व पूजा करते हैं उन्हें जीवन में कोई परेशानी नहीं होती. ऐसा कहा जाता है कि अमावस्या की रात भूत-प्रेत, पितृ, पिशाच, और निशाचर जैसी नकारात्मक शक्तियां बहुत सक्रिय रहती हैं. इसलिए अमावस्या पर भूलकर भी कुछ गलतियां नहीं करनी चाहिए.
श्मशान से दूर रहें-
अमावस्या की रात को गलती से भी श्मशान या उसके पास से होकर नहीं गुजरना चाहिए. अमावस्या की रात में सुनसान सड़कों पर जाने से भी बचना चाहिए. ऐसा कहते हैं कि अमावस्या पर कमजोर दिल के लोग नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव में जल्दी आ जाते हैं, इसलिए ऐसे लोगों को सतर्क रहना चाहिए.
तामसिक भोजन-
मार्गशीर्ष अमावस्या पर तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल न करें. इस दिन खाने में लहसुन, प्याज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इस दिन मांस, मछली और मदिरा-पान आदि से भी दूर रहना चाहिए.
लड़ाई झगड़ा-
अमावस्या के दिन घर में लड़ाई-झगड़ा करने से बचना चाहिए. ऐसा कहते हैं कि अमावस्या पर जिस घर में लड़ाई-झगड़े होते हैं, वहां कभी पितरों की कृपा नहीं रहती है. इसलिए इस दिन घर में शांति का वातावरण बनाए रखने का प्रयास करें. अमावस्या पर न तो क्रोध करें और न ही किसी को अपशब्द कहें.
देर तक न सोएं-
अमावस्या के दिन देर तक सोने से बचना चाहिए. ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद नहीं मिल पाता है. इस दिन सूर्योदय के साथ जागें और सूर्य देव को जल अर्पित करें.
शारीरिक संबंध-
अमावस्या के दिन पति पत्नी को शारीरिक संबंध बनाने से भी बचना चाहिए. ऐसा कहते हैं कि चौदस, अमावस्या और प्रतिपदा तीन ऐसी तिथियां होती हैं जब हमें तन और मन दोनों से पूर्णत: पवित्र रहना चाहिए.
मार्गशीर्ष अमावस्या 2022 शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 23 नवंबर को सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर शुरू होगी और 24 नवंबर को सुबह 4 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगी. मार्गशीर्ष माह की अमावस्या तिथि के दिन में स्नान और दान का विशेष महत्व है. कहते हैं कि ऐसा करने से लोगों को पितरों का आशीर्वाद मिलता है और मोक्ष के रास्ते खुलते हैं. 23 नवंबर को स्नान और दान के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 6 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगा.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मार्गशीर्ष माह को भगवान कृष्ण का प्रिय महीना कहा जाता है. इस माह आने वाली अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है. कहते हैं कि मार्गशीर्ष माह में आने वाली अमावस्या के दिन पितरों की मोक्ष प्रापित के लिए श्राद्ध किया जाता है. अमावस्या के दिन व्रत किया जाता है और इससे पितर प्रसन्न होते हैं. जब पितर प्रसन्न होते हैं तो घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का माहौल रहता है. अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है. साथ ही गरीबों व जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से भी लाभ मिलता है.