कई बार देखा गया है कि इंसान तमाम तरह के उपाय करने के बाद भी परेशानियों से घिरा रहता है. ऐसे लोगों के लिए गरुण पुराण में बताए गए कुछ उपाय कारगर साबित हो सकते हैं. दरअसल, सनातन धर्म में कुल 18 पुराण हैं, गरुण पुराणउनमें से एक है। गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु और गरुड़ के बीच बातचीत का वर्णन है। इसमें भगवान विष्णु ने गरुड़ देव के जीवन से लेकर मृत्यु तक के कई रहस्य उजागर किए हैं।
गरुण पुराण को किसी व्यक्ति के मृत्यु के बाद पढ़ा जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार मनुष्य अपने जीवन में जो भी कष्ट या परेशानियां हैं, वह सब कर्मों के आधार पर होती है। इसलिए मनुष्य को हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए। यदि आपने अच्छे कर्म किए तो आपकी पूरी जिंदगी बदल सकती है। गरुड़ पुराण के अनुसार यदि मनुष्य अपनी दिनचर्या में थोड़ा बदलाव ले आए तो उसे कई कष्टों से छुटकारा मिल सकता है। मनुष्य को जीवन में तरक्की और खुशहाली के लिए कुछ विशेष कार्य करने चाहिए। आइए जानते हैं क्या हैं वो कार्य-
कुल देव का पूजन
गरुड़ पुराण के अनुसार व्यक्ति को सुबह उठते ही अपने कुल देवता या कुल देवी का पूजन अवश्य करना चाहिए। दगरूद पुराण के अनुसार जब भी व्यक्ति कुल देवता या कुल देवी का पूजन करता है तो इससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
भगवान को नैवेद्य अर्पित करें
गरुड़ पुराण के अनुसार हर घर का एक नियम होना चाहिए जिसके अंतर्गत घर में स्वयं भोजन करने से पूर्व भगवान को भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस नियाम का पालन करते हैं उनसे माता अन्नपूर्ण प्रसन्न होती हैं और उनके घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती। लेकिन इस बात का ध्यान रखें भगवान को सात्विक भोजन का भोग ही लगाएं।
जरूरतमंद को करें अन्न दान
अन्न दान को महादान माना जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार किसी गरीब या जरूरतमंद को रोजाना भोजन अवश्य कराना चाहिए। यदि संभव हो तो अपनी आय का कुछ हिस्सा दान करना भी शुभ होता है। कहते हैं ऐसा करने से परिवार में बरकत आती है।
धर्म ग्रंथों का पाठ करें
गरुड़ पुराण के अनुसार जिन घरों में नियमित रूप से धर्मग्रंथों का पाठ होता है वहां सुख-शांति बनी रहती है। धर्म ग्रंथों में ज्ञान और धर्म-कर्म की कई बातों का उल्लेख मिलता है। जो व्यक्ति नियमित रूप से इन ग्रंथों का पाठ करता है उसके व्यवहार में भी बदलाव आता है।
गरुड़ पुराण के अनुसार मनुष्य को सही और गलत में अंतर जानना है तो उन्हें आत्म चिंतन या मनोविश्लेषण जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य यह समझ पाता है कि सारे दिन में उससे कहां गलती हुई है और इससे उसे क्या सबक लेना चाहिए।