
ग्वालियर :- नर्सिंग परीक्षाओं को लेकर शुक्रवार को ग्वालियर हाइकोर्ट की खंडपीठ में अहम सुनवाई हुई। नर्सिंग कालेजों की जांच सीबीआइ को सौंपी गई। सीबीआइ अब प्रदेश के 375 नर्सिंग कालेजों की जांच करेगी। इस दौरान सीबीआइ ने पूर्व में जारी जांच रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। इसके अलावा हाईकोर्ट ने सीबीआइ को 2020 से कालेजों के मापदंडों की जांच करने का आदेश दिया। 24 कालेजों की जांच में छह कालेजों में अनियमिताएं पाई गईं। मापदंडों पर वे सही नहीं पाए गए। वहीं पांच में भी कुछ न कुछ अनियमितताएं मिलीं। हाई कोर्ट के निर्देश पर मध्य प्रदेश नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल को भी पक्षकार बनाया गया। अगली सुनवाई 12 मई को होगी। ज्ञात हो 27 फरवरी 2023 को हाईकोर्ट ने नर्सिंग परीक्षाओं पर रोक लगाई थी। बीएससी नर्सिंग, बीएससी पोस्ट बेसिक और एमएससी नर्सिंग की परीक्षा पर रोक लगाई गई थी। मेडिकल यूनिवर्सिटी ने दो नोटिफिकेशन जारी कर सत्र 2019-21 के छात्रों को परीक्षा की अनुमति दी थी।
दरअसल दिलीप कुमार शर्मा ने पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग प्रथम वर्ष व बीएससी नर्सिंग प्रथम वर्ष की परीक्षा को लेकर जनहित याचिका दायर की। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी जबलपुर ने जुलाई 2022 से जनवरी 2023 के बीच कालेजों को संबद्धता दी। संबद्धता के बाद 11 से 18 फरवरी 2023 के बीच विद्यार्थियों का नामांकन किया गया। 28 फरवरी 2023 से परीक्षाओं की तारीख घोषित कर दी। परीक्षाएं सत्र 2020-21 की कराई जा रही हैं। जिनकी परीक्षा कराई जा रही है, उन्होंने चार साल पहले प्रवेश लिया था। बैक डेट में संबंद्धता दी गई है। विद्यार्थी भी सत्यापित नहीं है। हाई कोर्ट ने परीक्षा पर रोक लगा दी है, जिस प शासन रोक हटवाना चाहता है, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट मना कर दिया है। महाधिवक्ता ने 375 कालेजों की सूची दी थी, जिसमें कालेजों को सही बताया है। उनका पहले सत्यापन किया जाएगा। उन्हीं विद्यार्थियों को ही इजाजत मिल सकती है, जो वास्तविक हैं।