
कोरबा/हर साल 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य मलेरिया जैसी घातक बीमारी के नियंत्रण में तत्काल कार्रवाई करना है। भारत में भी हज़ारों लोग हर साल मच्छरों से होने वाली बीमारियों का शिकार होते हैं,जिनमें से एक मलेरिया और डेंगू भी है।मलेरिया एक जानलेवा बीमारी है,जो संक्रमित मच्छरों के काटने से होती है। मादा एनोफिलीज मच्छर अपनी लार के माध्यम से प्लास्मोडियम परजीवी फैलाती हैं,जो मलेरिया का कारण बनता है।

जिला मलेरिया नोडल अधिकारी डॉ कुमार पुष्पेश बताते हैं हालांकि इस बीमारी का बचाव और इलाज दोनों संभव है। छत्तीसगढ़ सरकार इस दिशा में लगातार कार्य कर रही है।मलेरिया से होने वाली मौतों की संख्या में 40% की गिरावट आई है। जिसका मतलब है कि लाखों लोगों की जान बचाते हुए मलेरिया के खिलाफ ऐतिहासिक प्रगति हो रही है।विश्व मलेरिया “मलेरिया रोग के बोझ को कम करने और जीवन बचाने के लिए नवाचार का उपयोगहै”।
कोरबा जिला नोडल अधिकारी डॉ कुमार पुष्पेश के मार्गदर्शन में वैश्विक मलेरिया उन्मूलन लक्ष्यों को प्राप्त करने महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नवाचारों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए विभिन्न तरीको की जागरूकताओं से जिलेवासियों को मलेरिया से सुरक्षित रखने वर्ष भर प्रचार-प्रसारजागरूकता, मच्छरदानी वितरण,जलजमाव के स्रोतों को कम करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

इतिहास
विश्व मलेरिया दिवस मूल रूप से एक ऐसी घटना है जिसे 2001 से अफ्रीकी सरकारों द्वारा मनाया जा रहा है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रायोजित एक बैठक में प्रस्तयह दुनिया भर के देशों में मलेरिया के अस्तित्व की पहचान करने में मदद करेगा और मलेरिया के खिलाफ लड़ने के लिए विश्व स्तर पर लोगों में जागरूकता लाने में भी मदद करेगा।