
झारखंड:- देश में आज कई गांव ऐसे हैं जहां पूरी तरह बिजली नहीं पहुंच पाई है सरकार के अथक प्रयासों से भी ये गांव बिजली की सुविधाओं से वंचित है कहीं राज्यों के ऐसे पिछड़े गांव हैं जिनमें ना तो पूरी तरह पानी की व्यवस्था है और ना ही बिजली का प्रबंध, वहां के ग्रामीण आज भी अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर है. ऊपर से बिजली इतनी महंगी हो चुकी है कि ग्रामीण और देहाती लोग बिल ना देने के कारण बिजली कनेक्शन करवाने से डरते हैं और बिजली का लाभ नहीं ले सकते।
एक ऐसा ही गांव हैं झारखंड के लोहरदगा जिले का खड़िया गांव, जिसमें ग्रामीण अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर थे उनके पास बिजली का कोई पर्याप्त साधन नहीं था, गांव पूरी तरह अंधेरे से घिरा रहता था, लेकिन ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए एक युवक ने कुछ ऐसा सोचा कि गांव की तकदीर ही बदल गई आइए जानते हैं इस युवक की ऐसी तरकीब जिसने पूरे गांव को रोशन कर दिया.
इस युवक का नाम है कमल टोपनो जो तकरीबन 28 साल का है. इस युवक का गांव जिसने अब तक दिया और लालटेन की रोशनी ही देखी थी लेकिन इस युवक ने ठानी गांव को रोशन करने व और घर घर बिजली पहुंचाने की, इसने यूट्यूब के जरिए टरबाइन तकनीक सीखी और खुद बिजली बनाने का काम शुरू किया इसके बाद उसने एक गड्ढा खोदा। उसमें टरबाइन स्थापित किया और आज गांव में 24 घंटे मुफ्त बिजली मिल रही है। रखरखाव पर जो थोड़ा-बहुत खर्चा होता है, वो सब मिलकर भर देते हैं। हैरानी की बात यह है कि यह युवक कोई इंजीनियर नहीं हैं। यह हैं इंटर पास कमिल टोपनो। इस प्रोजेक्ट में करीब 12 हजार रुपए खर्च हुए। यह 2500 बॉट की बिजली का उत्पादन करता है।
कमिल के प्रोजेक्ट को देखकर अफसर भी हैरान हैं। किस्को के बीडीओ संदीप भगत ने कहा है कि पहाड़ी इलाकों में बिजली पहुंचाना वाकई टेड़ी खीर है। लेकिन कमिल के इस प्रोजेक्ट ने एक आस जगाई है। अफसर उसका अवलोकन करके ऐसे ही टरबाइन अन्य गांवों में लगाएंगे। कमिल ने बिरसा मुंडा कॉलेज खूंटी से इंटर सांइस की पढ़ाई की है। वे बीसीसीएल धनबाद में पैथोलॉजी के टेक्नीशियन हैं। कमिल ने बताया कि उन्होंने किताबों में पढ़ा था कि पानी के प्रेशर से कैसे टरबाइन से बिजली पैदा की जा सकती है? बस उसी पर अमल किया।