रायपुर
कांग्रेस ने 2018 के अपने चुनावी जन घोषणा पत्र में सरकार के विभिन्न विभागों में काम करने वाले संविदा, दैनिक वेतन भोगी (दैवेभो) और अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था। यह वादा अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। कर्मचारी संगठन यह वादा पूरा करने के लिए लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि सरकार भी अपने इस वादा को पूरा करने की दिशा में 2019 से ही प्रयास कर रही है, लेकिन विभागों से पूरी जानकारी नहीं मिलने के कारण मामला अटका हुआ है। अब सरकार जल्द ही अपना यह वादा भी पूरा करने जा रही है। चर्चा है कि छह जुलाई को प्रस्तावित कैबिनेट की बैठक में सरकार इस पर बड़ा फैसला ले सकती है।
अफसरों के अनुसार विधानसभा के मानसून सत्र की अधिसूचना जारी हो चुकी है। ऐसे समय में सरकार विधानसभा के बाहर कोई भी बड़ी घोषणा करने से बचती है। चर्चा है कि छह जुलाई को कैबिनेट की बैठक में यदि इसको लेकर कोई निणर्य होता है तो बहुत संभव है कि इसकी घोषणा 18 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के सत्र के दौरान की जाए। वहीं, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले सरकार यह घोषणा जरुर करेगी। ऐसे में सरकार के पास अभी 15 अगस्त तक का समय है।
कर्मचारियों के नियमितकरण को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) 2019 से ही सक्रिय है। बीते चार वर्षों जीएडी ने कई बार विभागों को पत्र लिखकर उनके यहां कार्यरत संविदा, दैवेभो और अनियमित कर्मचारियों की जानकारी मांग चुका है। विभागीय अफसरों के अनुसार अभी तक केवल 24 विभागों ने ही पूरी जानकारी भेजी है। बाकी 23 विभागों से अभी तक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।
प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा 25 हजार 738 संविदा कर्मचारी है। जीएडी को अभी तक जिन 24 विभागों ने जानकारी भेजी है उनमें कुल 36 हजार से ज्यादा संविदा कर्मचारी है। स्वास्थ्य विभाग के बाद पंचायत विभाग में 5426 कर्मचारी हैं। वहीं, ऊर्जा विभाग में 2685, महिला एवं बाल विकास विभाग में 637, वन विभाग में 113, विमानन में 50, आईटी में 52 सहित अन्य शामिल हैं।
जीएडी को विभिन्न विभागों से दैवेभो और अनियमित कर्मचारियों की जो जानकारी पहुंची है उसके अनुसार इनकी संख्या 50 हजार से कुछ अधिक है। इस श्रेणी के सबसे ज्यादा कर्मचारी पंचायत विभाग में हैं। वहां दैवेभो और अनियमित कर्मियों की संख्या 10 हजार से अधिक है। वहीं, वन विभाग में सात हजार 700 से अधिक हैं। वन विभाग में इनकी संख्या 6600 से अधिक है। पीडब्ल्यूडी में छह हजार, स्वास्थ्य में पांच हजार, कृषि में 4400, स्कूल शिक्षा में लगभग 2300 और खाद्य विभाग में 2100 के आसपास दैवेभो और अनियमित कर्मचारी हैं।