ब्रिटेन में पानी के अंदर अंतिम संस्कार करने की तैयारी चल रही है. आपको ये सुनकर हैरानी हो रही होगी लेकिन ये कारनामा ब्रिटेन की सबसे बड़ी फ्यूनरल कंपनी को-ऑप फ्यूनरलकेयर करने जा रही है. उसने पुष्टि की है कि वो साल के अंत तक ये सेवा शुरू कर देगी. इस तरह का अंतिम संस्कार लोगों को शव को दफनाने की जगह पानी में अंतिम संस्कार का विकल्प देता है.दरअसल जब शव का अंतिम संस्कार जलाकर किया जाता है तो हम बहुत सारे ईधन की खपत होती है और ये काफी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करते हैं.
अभी पारंपरिक तौर पर दाह संस्कार के अलावा दफनाकर शव का अंतिम संस्कार किया जाता है. आइए आपको बताते हैं कि को-ऑप फ्यूनरलकेयर ने ये योजना क्यों पेश की है और वाटर क्रिमेशन में मानव के शव के साथ क्या होता है?कैसे होता है वाटर क्रिमेशन?को-ऑप फ्यूनरलकेयर वाटर क्रिमेशन के जरिए लोगों को पर्यावरण के अनुकुल दाह संस्कार का विकल्प दे रहा है. एक्वामेशन प्रक्रिया के दौरान शव को स्टेनलेस स्टील के बर्तन में रखा जाता है
शव के दाह संस्कार के समय में भी आखिरी में ये ही होता है. ज्वाला दाह संस्कार के पर्यावरणीय प्रभाव का लगभग दसवां हिस्सा एक्वामेशनम(वाटर क्रिमेशन का होता है). दाह संस्कारके लिए काफी ईधन की जरूरत होती है. दाह संस्कार पर्यावरण के लिए हानिकारक है क्योंकि इससे बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसें निकलती हैं.
वहीं दफनाने से भूजल दूषित होने का खतरा बना रहता है. अमेरीकी एजेंसी के मुताबिक एक औसत दाह संस्कार में लगभग 535 पाउंड कार्बन डाइऑक्साइड पैदा होती है, जो लगभग 600 मील कार चलाने के बराबर है. वहीं दफनाने के दौरान अगर शव को धातु या प्लास्टिक में रखा जाता है, तो उसे उसे मिट्टी में सड़ने में कई साल लग जाते हैं.वाटर क्रिमेशन में कितना आता है खर्च?वाटर क्रिमेशन में अभी कितनी लागत आएगी, ये स्पष्ट नहीं है.