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    Home » केंद्र सरकार ने देश के कानूनी ढांचे में बदलाव की ओर बढ़ाए कदम , जानें और बड़ी बातें
    राजनीति

    केंद्र सरकार ने देश के कानूनी ढांचे में बदलाव की ओर बढ़ाए कदम , जानें और बड़ी बातें

    By Tv 36 HindustanAugust 11, 2023No Comments5 Mins Read
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    नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम में सुधार के लिए शुक्रवार को लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए हैं. ये तीनों कानून देश में ब्रिटिश काल से लागू हैं. इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य न्याय सुनिश्चित करना है, सजा देना नहीं. उन्होंने कहा, जिन कानूनों को निरस्त किया जाएगा, उन कानूनों का फोकस ब्रिटिश प्रशासन की रक्षा करना था और उन्हें मजबूती देना था. उन कानून में दंड देने का विचार था, न्याय देना नहीं. अब नए तीनों कानून भारतीय नागरिक के अधिकारों की रक्षा करेंगे.
    उन्होंने कहा, भारतीय न्याय संहिता, 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023 को आगे की जांच के लिए संसदीय पैनल के पास भेजा जाएगा. अमित शाह ने कहा, नए कानून में हमारा लक्ष्य सजा देना नहीं है, बल्कि न्याय दिलाना होगा. शाह ने कहा, प्रधानमंत्री जी ने गत 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश के सामने 5 प्रण रखे थे. उनमें से एक प्रण था कि हम गुलामी की सभी निशानियों को समाप्त कर देंगे. आज मैं जो 3 विधेयक लेकर आया हूं, वो तीनों विधेयक मोदी जी द्वारा लिए गए प्रण में से एक प्रण को पूरा कर रहे हैं.

    बिल में नया क्या है…

    • बिल के मुताबिक, नए कानूनों के माध्यम से कुल 313 परिवर्तन किए गए हैं. सरकार द्वारा आपराधिक न्याय प्रणाली में पूर्ण बदलाव किया गया है. जिन धाराओं में 7 साल से ज्यादा की सजा है, वहां पर फॉरेंसिक टीम सबूत जुटाने पहुंचेगी.
    • राजद्रोह की सजा बदली गई है. प्रस्तावित धारा 150 में राजद्रोह को लेकर प्रावधान है. राजद्रोह के लिए आजीवन कारावास या तीन साल तक की कैद की सजा हो सकती है. नया प्रावधान 3 साल की कैद को 7 साल की कैद में बदल देता है.
    • 2027 से पहले देश की सभी कोर्ट को कंप्यूटराइज किया जाएगा. किसी भी शख्स को गिरफ्तार किया जाएगा तो उसके परिवार वालों को तुरंत जानकारी दी जाएगी. इसके लिए एक ऐसा पुलिस अधिकारी नियुक्त किया जाएगा.
    • 3 साल तक की सजा वाली धाराओं का समरी ट्रायल होगा. इससे मामले की सुनवाई और फैसला जल्द आ जाएगा. चार्ज फ्रेम होने के 30 दिन के भीतर न्यायाधीश को अपना फैसला देना होगा.
    • सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अगर कोई मामला दर्ज है तो 120 दोनों के अंदर केस चलाने की अनुमति देनी जरूरी है.
    • संगठित अपराध में कठोर सजा का प्रावधान किया गया है. मृत्य की सजा को आजीवन कारावास में बदला जा सकता है, लेकिन पूरी तरह बरी करना आसान नहीं होगा.
    • राजद्रोह को पूरी तरह से खत्म किया जा रहा है. दोषियों की संपत्ति कुर्क करने का आदेश कोर्ट देगा, ना कि पुलिस अधिकारी.
    • सबको 3 साल के अंदर न्याय मिलेगा.

    प्रस्तावित नई आईपीसी की धाराएं…

    145: भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ना/युद्ध छेड़ने का प्रयास करना या युद्ध छेड़ने के लिए उकसाना. यह वर्तमान धारा 121 के समान है.

    146: युद्ध छेड़ने की साजिश. यह वर्तमान धारा 121ए के समान है.

    147: भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ने के इरादे से हथियार आदि एकत्र करना. यह वर्तमान में धारा 122 के समान है.
    राजद्रोह का कानून खत्म होगा. इसकी जगह अब धारा 150 के तहत आरोप तय किए जाएंगे.
    धारा 150 कहती है- भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य.
    धारा 150 कहती है…
    जो कोई, जानबूझकर या जानबूझकर बोले गए या लिखे गए शब्दों से या संकेतों द्वारा या दृश्य प्रतिनिधित्व द्वारा या इलेक्ट्रॉनिक संचार द्वारा या वित्तीय साधनों के उपयोग से या अन्यथा अलगाव या सशस्त्र विद्रोह या विध्वंसक गतिविधियों को उत्तेजित करता है या उत्तेजित करने का प्रयास करता है या अलगाववादी गतिविधियों की भावनाओं को प्रोत्साहित करता है या भारत की संप्रभुता या एकता और अखंडता को खतरे में डालता है या ऐसे किसी भी कार्य में शामिल होता है या करता है तो उसे आजीवन कारावास या कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

    रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने पर सजा

    नए कानून में बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर करने पर सजा का प्रावधान है. धारा 72. (1) में जो कोई नाम या किसी भी मामले को मुद्रित या प्रकाशित करता है, जिससे किसी ऐसे व्यक्ति की पहचान हो सकती है जिसके खिलाफ धारा 63 या धारा 64 या धारा 65 या धारा 66 या धारा 67 या धारा 68 के तहत अपराध का आरोप लगाया गया है या पाया गया है- अपराध किया गया है (इसके बाद इस धारा में पीड़ित के रूप में संदर्भित किया गया है) को किसी भी अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

    आजीवन कारावास को किया गया परिभाषित
    आजीवन कारावास को प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास के रूप में परिभाषित किया गया. कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास होगा और जुर्माने भी वसूल किया जाएगा.

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