नई दिल्ली में दो दिन तक चले जी 20 शिखर सम्मलेन का आज समापन हो गया है. G20 शिखर सम्मेलन में देश भर की संगीत परंपराओं का प्रदर्शन किया गया. सम्मेलन के पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से जी 20 सदस्यों के लिए डिनर का आयोजन किया. इस भव्य डिनर में दुनिया ने भारत की अलग-अलग संगीत विरासत की झलक देखी.आयोजन के दौरान मुख्य आकर्षण ‘गंधर्व अटोद्यम’ था. यह एक अद्वितीय संगीतमय मिश्रण है, जिसमें पूरे भारत के संगीत वाद्ययंत्रों की एक एक्सिलेंट सिम्फनी शामिल है, जो शास्त्रीय वाद्ययंत्रों के समूह के साथ हिंदुस्तानी, लोक और समकालीन संगीत का प्रदर्शन करती है.
लोक गायक के प्रदर्शन से मिलेगा फायदा- गुजराती लोक गायिकाभव्य डिनर में प्रस्तुति देने वाली गुजराती लोक गायिका उर्वशी रदाडिया ने कहा, ”मेरे लिए यह बहुत गर्व की बात है. इतने बड़े अंतर्राष्ट्रीय मंच पर विदेशी मेहमानों के सामने गुजराती लोक गायक के प्रदर्शन से हमारे इंडस्ट्री को भी बहुत फायदा मिलेगा. मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करना चाहूंगी. ईश्वर तक पहुंचने का रास्ता संगीत है. संगीत एक ऐसी चीज़ है, जिससे हम एक-दूसरे को समझ सकते हैं.”#
डिनर में दिखी भारत के संगीत विरासत की झलकहिंदुस्तानी संगीत: राग दरबारी कांदा और काफ़ी-खेलत होरीलोक संगीत: राजस्थान – केसरिया बालम, घूमर और निम्बुरा निम्बुराकर्नाटक संगीत: राग मोहनम – स्वागतम कृष्णलोक संगीत: कश्मीर, सिक्किम और मेघालय – बोम्रू बोम्रूहिंदुस्तानी संगीत: राग देश और एकला चलो रेलोक संगीत: महाराष्ट्र – अबीर गुलाल (अभंग), रेशमा चारे घानी (लावनी), गजर (वारकरी)कर्नाटक संगीत: राग मध्यमावती – लक्ष्मी बरम्मालोक संगीत: गुजरात- मोरबानी और रामदेव पीयर हेलोपारंपरिक और भक्ति संगीत: पश्चिम बंगाल – भटियाली और अच्युतम केशवम (भजन)लोक संगीत:
कर्नाटक – मदु मेकम कन्नै, कावेरी चिंदु और आद पम्बेभक्ति संगीत: श्री राम चंद्र कृपालु, वैष्णव जन और रघुपति राघवहिंदुस्तानी, कर्नाटक और लोक संगीत: राग भैरवी- दादरा, मिले सुर मेरा तुम्हारा
डिनर के दौरान भारत की अद्वितीय विरासत को प्रदर्शित करने वाले अलग-अलग दुर्लभ वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल किया गया. इन वाद्ययंत्रों में सुरसिंगार, मोहन वीणा, जलतरंग, जोडिया पावा, धंगाली, दिलरुबा, सारंगी, कमाइचा, मट्टा कोकिला वीणा, नलतरंग, तुंगबुक, पखावज, रबाब, रावणहत्था, थाल दाना, रुद्र वीणा आदि शामिल थे.
