अच्छे स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद को बेहद जरूरी माना गया है। अध्ययनों में पाया गया है कि जिन लोगों की रात की नीद पूरी नहीं होती है उनमें कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के विकसित होने का जोखिम रहता है। इतना ही नहीं अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के उपचार में नींद की गुणवत्ता को बढ़ाने से स्वास्थ्य लाभ देखा गया है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को रात में 6-8 घंटे की निर्बाध नींद लेने की सलाह देते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अच्छी नींद लेना चाहते हैं तो इसके लिए बेडरूम के माहौल को ठीक रखना बहुत आवश्यक है। कमरे का शांत और अंधेरे वाला होना चाहिए, इसके अलावा कमरे का तापमान भी आपकी नींद की गुणवत्ता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शोधकर्ताओं ने इससे संबंधित एक हालिया अध्ययन में बताया कि अगर कमरे का तापमान 20-25 डिग्री सेल्सियस के बीच रखा जाए तो यह नींद को बेहतर बनाने के लिए अनुकूल हो सकती है।
नींद की गुणवत्ता और रूम टेंपरेचर
नींद की गुणवत्ता और रूम टेंपरेचर के बीच के संबंधों को जानने के लिए किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि अगर कमरे का तापमान ठीक रहता है तो इससे अच्छी नींद पाने में मदद मिल सकती है।
साइंस ऑफ द टोटल
एनवायरनमेंट जर्नल में ऑनलाइन प्रकाशित शोध में 2021 से 2023 तक 50 लोगों की नींद की आदतों का आकलन किया गया। रात के तापमान को ट्रैक करने के लिए उनके शयनकक्षों में पर्यावरण सेंसर लगाए गए और प्रतिभागियों को स्मार्टफोन से जुड़ी एक अंगूठी पहनाई गई ताकि यह मापा जा सके कि वे कितनी देर तक सोए और कितनी करवटें बदलीं। मॉनिटर ने श्वसन, हृदय गति और शरीर के तापमान पर भी नजर रखी।
20-25 डिग्री सेल्सियस रखें तापमान
अध्ययन की रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि जब कमरे का तापमान 20-25 डिग्री सेल्सियस के बीच की थी, उस दौरान प्रतिभागियों की नींद की गुणवत्ता सबसे अच्छी थी। हालांकि जब तापमान बढ़कर 25-30 डिग्री सेल्सियस हो गई तो नींद की क्वालिटी में 5% से 10% की कमी आ गई।
अध्ययन के मुख्य लेखक और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में प्रोफेसर अमीर बनियासादी कहते हैं, हमने पाया कि रूम का तापमान ठीक रखकर नींद की क्वालिटी में सुधार किया जा सकता है। अगर हमें अपने निष्कर्षों के आधार पर सुझाव देना हो तो यही है कि तापमान को 20-24 डिग्री के बीच बनाए रखनी चाहिए।
अध्ययन का निष्कर्ष
अध्ययन में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के जोखिमों को देखते हुए इस अध्ययन की रिपोर्ट पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना आवश्यक है। शोधकर्ताओं ने कहा, “इसके अतिरिक्त, हमारा अध्ययन वृद्ध लोगों में नींद की गुणवत्ता पर जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभावों को रेखांकित करता है। नींद की क्वालिटी में सुधार करके आप कई प्रकार की न्यूरोडिजेनरेटिव बीमारियों के जोखिमों को कम कर सकते हैं। संपूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने में नींद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
