भारत ने पिछले सीजन की तुलना में अपने पदकों की संख्या में इजाफा किया जब वह तीन पदक जीतने में सफल रहा था. हालांकि भारत इस बार स्वर्ण पदक जीतने में नाकाम रहा जबकि जकार्ता में पांच वर्ष पहले नौकायन में एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक मिले थे. भारत यहां कुल 5वें स्थान पर रहा जो 2018 के प्रदर्शन से एक स्थान बेहतर है.
चीन की टीम 11 स्वर्ण और दो रजत पदक के साथ शीर्ष पर रही जबकि उज्बेकिस्तान दो स्वर्ण, चार रजत और एक कांस्य पदक के साथ दूसरे स्थान पर रहा.बता दें कि सोमवार की शुरुआत जसविंदर सिंह, भीम सिंह, पुनीत कुमार और आशीष गोलियान की टीम ने पुरुष फोर स्पर्धा में कांस्य पदक के साथ की जिसके बाद सतनाम सिंह, परमिंदर सिंह, जाकर खान और सुखमीत सिंह ने पुरुष क्वाड्रपल स्कल्स में कांस्य पदक अपने नाम किया.
क्वाड्रपल स्कल्स में भारतीय टीम ने छह मिनट 8.61 सेकंड का समय लिया. चीन (6:02.65) को स्वर्ण जबकि उज्बेकिस्तान (6:04.64) को रजत पदक मिला. पुरुष फोर स्पर्धा में भी भारतीय चौकड़ी 2000 मीटर के अंतिम 500 मीटर से पहले चौथे स्थान पर चल रही थी लेकिन शानदार वापसी करते हुए छह मिनट 10.81 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक जीतने में सफल रही. चीन (6:10.04) ने बेहद मामूली अंतर से भारतीय टीम को पछाड़कर रजत पदक जीता. स्वर्ण पदक उज्बेकिस्तान की टीम के नाम रहा जिसने छह मिनट 4.96 सेकेंड का समय लिया.
भारत के बलराज पंवार हालांकि पुरुष एकल स्कल्स में चौथे स्थान पर रहते हुए एशियन गेम्स में अपना पहला पदक जीतने से चूक गए. करनाल के 24 वर्षीय बलराज 1500 मीटर तक शीर्ष-3 में शामिल थे लेकिन अंतिम 500 मीटर में चौथे स्थान पर पिछड़ गए. उन्होंने सात मिनट 8.79 सेकंड का समय लिया.
