कोटा. कोचिंग सिटी कोटा में विद्यार्थियों द्वारा सुसाइड के बढ़ते मामलों को लेकर राजस्थान सरकार ने जरूरी दिशा- निर्देश जारी कर दिए हैं. कोटा में लगातार हो रही सुसाइड के चलते राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने 18 अगस्त को कोचिंग संचालकों के साथ बातचीत कर समस्या का समाधान निकालने के लिए एक हाई लेवल कमेटी गठित की थी. शिक्षा सचिव भवानी सिंह देथा की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी में अलग- अलग क्षेत्रों के 15 विशेषज्ञों द्वारा गहन अध्ययन और विश्लेषण करने के बाद रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. उसे राज्य सरकार द्वारा स्वीकार कर लिया गया है.
कमेटी द्वारा जारी रिपोर्ट में कोचिंग संस्थानों के भीतर छात्रों
में बढ़ते तनाव और आत्महत्या की मुख्य वजहों को लेकर सिलसिलेवार तरीके से बताया गया है. इसके अलावा समस्या से निपटने के लिए कुछ सुझाव भी दिए गए हैं. इसके तहत छात्रों की मॉनिटरिंग, प्रवेश से पहले छात्र का स्क्रीनिंग टेस्ट एवं स्टूडेंट्स के साथ- साथ हर 3 महीने में उनके पैरेन्ट्स की काउंसलिंग का सुझाव भी शामिल किया गया है.
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ये बताए गए हैं विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव, मानसिक दबाव व आत्महत्या के 6 बड़े कारण
1. प्रतियोगी परीक्षाओं में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, सफलता की सीमित संभावना तथा सिलेबस एवं टेस्ट पेपर कठिन होने के कारण छात्रों में उत्पन्न मानसिक दबाव एवं निराशा.2. माता – पिता की अत्यधिक अपेक्षाएं, बच्चों की योग्यता और उनकी रुचि से ज्यादा उन पर पढ़ाई का बोझ.3. कम उम्र में होने वाले व्यवहारात्माक परिवर्तन, परिवार से दूर रहना, काउंसलिंग का अभाव एवं समुचित शिकायत निवारण तंत्र का अभाव.4. असेसमेंट टेस्टों की अधिकता, टेस्ट परिणाम को सार्वजनिक करना, विद्यार्थियों पर टिप्पणी करना और रैंक के आधार पर बैच सेग्रिगेशन.
5. कोचिंग संस्थानों का अत्यधिक व्यस्त कार्यक्रम और विस्तृत कार्यक्रम.6. छुट्टियों का अभाव, नीरस वातावरण एवं सह- शैक्षणिक गतिविधियों का अभाव.
कोचिंग संस्थानों के लिए ये जारी किए गए हैं दिशा- निर्देश1. नई गाइडलाइन के मुताबिक कोई भी कोचिंग संस्थान 9वीं कक्षा के पहले किसी विद्यार्थी को अपने संस्थान में प्रवेश नहीं दे सकेगा. विद्यार्थी के प्रवेश से पहले स्क्रीनिंग टेस्ट के माध्यम से उसकी क्षमता एवं अभिरुचि का आंकलन किया जाएगा. यदि कोई विद्यार्थी 9वीं कक्षा से पहले कोचिंग छोड़ना चाहता है तो उसकी बकाया फीस वापस की जाए.2. रिजल्ट के आधार पर अलग बैच न बनाएं. रिजल्ट को सार्वजनिक न करें और जो बच्चा कम नंबर ला रहा है उसकी काउंसलिंग करें.
3. कोचिंग संस्थान अपने विद्यार्थियों से नियमित संवाद करें और स्टाफ की विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा गेटकीपर ट्रेनिंग जरूर कराएं.4. किशोरावस्था की मानसिक स्थिति को जानने वाले मनोसलाहकारों की नियुक्ति जरूर करें.5. नियमित अवकाश एवं सह- शैक्षणिक गतिवियां आयोजित करें.7. इजी एग्जिट ऑफ्शन और रिफंड पॉलिसी को तुरंत लागू करें.7. विद्यार्थियों की समस्याओं को दर्ज कराने के लिए टेली मानस एवं अन्य टोल फ्री नंबर जारी किए जाएं.
हॉस्टल एवं पीजी संचालकों के लिए ये दिशा- निर्देश दिए गए हैंनई गाइडलाइन के अनुसार हॉस्टल संचालक क्षमता से अधिक बच्चों को एंट्री न दें. इसके साथ ही विद्यार्थी के द्वारा बीच में हॉस्टल छोड़ने पर उसका बकाया चार्ज लौटाया जाए. इसके अलावा हॉस्टल या पीजी में सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएं एवं विद्यार्थियों की रोजाना बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज की जाए.
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