ग्वालियर। मैंने दस बार कहा है और अब 11वीं बार कह रहा हूं कि मैं किसी भी रेस में न यहां हूं न कांग्रेस में था। मुझे यदि मध्य प्रदेश में किसी भी सीट से उम्मीदवार बनने को कहा जाता तो मैं चुनाव लड़ता, लेकिन इस संबंध में मुझ से पार्टी की कोई चर्चा नहीं हुई।
एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मुख्यमंत्री पद की सिंधिया परिवार ने कभी चाहत नहीं रखी, मेरी आजी अम्मा एवं मेरे पूज्य पिता भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे, लेकिन कभी कुर्सी के पीछे नहीं भागे।
कमल नाथ और दिग्विजय सिंह जैसे मेरा संकल्प कुर्सी के साथ नहीं बल्कि जनता के साथ है। मैं तो विकास के मुद्दे को लेकर कांग्रेस से भाजपा में आया था और मुझे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ।
2018 के पिछले विधानसभा चुनाव में जिस ग्वालियर-चंबल अंचल के कारण भाजपा ने राज्य में सत्ता गंवाई थी, इस बार वहां पार्टी पूरी जान फूंक रही है। उस अंचल की राजनीति की धुरी केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया इन दिनों एक-एक विधानसभा क्षेत्रों में जाकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की बैठकें ले रहे हैं एवं उनकी ट्रेनिंग करवा रहे हैं।
