मध्यप्रदेश। वैसे तो छिंदवाड़ा में एक ही नाम का सिक्का चलता है. वो है कमलनाथ के नाम का.
जानकार कहते हैं कि वो कमलनाथ ही हैं जो अपने संगठन की लाइन से हटकर भी चलते हैं और उनपर कोई कार्रवाई भी नहीं होती है और ना ही कोई कारण पूछा जाता है.
इसलिए वो छिंदवाड़ा में हर तरह का राजनीतिक प्रयोग भी करते रहते हैं. अब उन्होंने ख़ुद को ‘हनुमान भक्त कमलनाथ’ के रूप में स्थापित कर लिया है.
वरिष्ठ पत्रकार संजय सक्सेना मानते हैं कि कमलनाथ का काम करने का तरीक़ा बिल्कुल अलग है और वो पार्टी की तय की गई हुई लाइन से अलग हटकर भी काम करते हैं.
वो कहते हैं कि पिछले विधानसभा चुनावों से पहले कमलनाथ ने एक तरह से ख़त्म हो गई कांग्रेस में दोबारा जान फूँक दी थी.
वो कहते हैं, “आज मध्य प्रदेश में कांग्रेस अगर मज़बूत हुई है और अगर वो भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने के काबिल हुई है तो उसका क्रेडिट कमलनाथ को ही जाता है. इसलिए उनके निर्णयों को पार्टी हाईकमान भी अनदेखा कर देता है. छिंदवाड़ा की अगर सातों सीटें कांग्रेस के पास हैं तो वो कमलनाथ की वजह से ही. इस इलाक़े में टिकट किसको मिलेगा ये सिर्फ़ कमलनाथ तय करते हैं और पार्टी उनकी सलाह पर ही चलती है. इसलिए इस क़िले को भेदना आसान नहीं है.”
लेकिन इसकी वजह से पार्टी का एक तबक़ा असंतुष्ट भी रहता है. ये तबक़ा है बड़े नेताओं का, जो दबी ज़ुबां से कहते हैं कि अब पार्टी में कमलनाथ के सामने उनकी कुछ चलती नहीं है.
छिंदवाड़ा में या तो कमलनाथ या फिर उनके सांसद पुत्र नकुलनाथ को ही नेता के रूप में देखा है.
इसमें कोई शक नहीं कि छिंदवाड़ा, कमलनाथ का सबसे मज़बूत क़िला है. उन्हें छिंदवाड़ा में किसी भी सीट पर चुनौती देना बड़े-बड़े नेताओं के लिए टेढ़ी खीर।
