रायपुर:- पौराणिक मान्यता के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी। हिंदू धर्म में प्राचीन काल से रुद्राक्ष को अपनी दिव्य चिकित्सा शक्तियों के कारण सबसे कीमती मोतियों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि जिन पर भगवान शिव की कृपा होती है उन्हें ही इसे धारण करने का अवसर प्राप्त होता है। ‘रुद्राक्ष’ शब्द का अर्थ रुद्र शिव की आंखें और उनके आंसू अक्ष हैं।रुद्राक्ष को सोमवार के दिन भगवान शिव को चढ़ाकर पहनना शुभ माना गया है। शिव महापुराण में 16 तरह के रुद्राक्षों के बारे में बताया गया है। और सभी का अपना अलग महत्व है। आइए जानते हैं एक मुखी रुद्राक्ष के फायदों के बारे में।
ये है पहचान करने का सही तरीका
एक मुखी रुद्राक्ष की पहचान करने के लिए कई तरह के तरीके बताए गए हैं। एक मुखी रुद्राक्ष में एक ही धारी होती है। अगर सही तरीके से असली- नकली की पहचान करनी है तो गर्म पानी में रुद्राक्ष को उबालें। अगर रुदाक्ष अपना रंग छोड़ता है, तो वे असली नहीं है। रुद्राक्ष के प्रभाव से व्यक्ति अपनी इंद्रियों को वश में करने में सक्षम होता है। धन प्राप्ति में भी एक मुखी रुद्राक्ष फायदेमंद है। वहीं, छात्रों के लिए भी ये बहुत लाभकारी है। करियर में सफलता पाने के लिए एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी जाती है।
रुद्राक्ष पहनने से ब्रह्मा विष्णु महेश से मिलता है आशीर्वाद
हिंदू धर्म में पूजा पाठ अनुष्ठान जब आदि के लिए रुद्राक्ष माला का भी उपयोग करते हैं।आध्यात्मिक रुद्र माला में आमतौर पर 108 मनके होते हैं।ये विभिन्न स्वरूपों में पाए जा सकते हैं, अर्थात् एक मुखी से लेकर 27 मुखी तक। माना जाता है जो कोई भी इन मोतियों को पहनता है, उसके पास तीनों दिव्य देवताओं यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का आशीर्वाद होता है।
