नई दिल्ली:- सऊदी अरब के राजदूत ने कहा, हमने इस महीने रियाद में अरब-इस्लामिक समिट का आयोजन किया था. इस समिट में कई अहम प्रस्ताव पास किए गए थे. इस समिट में एक प्रतिनिधिमंडल बनाया था और इसे ज़िम्मेदारी दी गई थी कि दुनिया भर के देशों में जाकर ग़ज़ा में युद्धविराम के लिए समर्थन जुटाए. बिना युद्धविराम के और ज़्यादा लोगों की जान जाएगी. इसीलिए मध्य-पूर्व में शांति के लिए तत्काल युद्धविराम की ज़रूरत है.
अरब देशों के राजनयिकों की बैठक को भारत में फ़लस्तीनी राजदूत अदनान अबु अल-हाइजा ने भी संबोधित किया.
उन्होंने गज़ा और वेस्ट बैंक में मौजूदा हालात की चर्चा की. अल-हाइजा ने कहा कि इसराइली प्राधिकरण ने 7 अक्तूबर से पहले ही फ़लस्तीन विरोधी तरीक़े अपनाने शुरू कर दिए थे.
अल-हाइजा ने इसराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन गिविर को 21 मई को यरुशलम में अल-अक़्सा मस्जिद में जाने का मुद्दा उठाया.
उन्होंने कहा, “सात अक्तूबर फ़लस्तीनियों लोगों के ख़िलाफ़ जारी बर्बर इसराइली आक्रमण की प्रतिक्रिया थी, ख़ासतौर पर ग़ज़ा पट्टी में जो हमारे लोग पिछले 17 सालों से खुली जेल में और ग़रीबी की विनाशकारी परिस्थितियों में रह रहे हैं.”
फ़लस्तीनी राजदूत ने कहा कि ग़ज़ा पट्टी में इसराइली हमले में 14,128 फ़लस्तीनी मारे गए हैं और 33,000 से अधिक घायल हुए हैं.
उन्होंने कहा कि कम से कम छह हज़ार फ़लस्तीनी ग़ायब हैं और माना जा रहा है कि वो इसराइली बमबारी में तबाह हुई इमारतों के नीचे दबे हैं.
