मध्यप्रदेश:- 32 सालों के संघर्ष के बाद हुकुमचंद मिल के मजदूरों को उनका हक मिल गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज डिजीटली ‘मजदूरों के हित मजदूरों को समर्पित’ कार्यक्रम में जुड़कर 224 करोड़ रुपए का चेक श्रमिकों को सौंपा. इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि इंदौर के लोग 25 दिसंबर को श्रमिकों को न्याय मिलने के दिन के तौर पर याद रखेंगे. कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सीएम मोहन यादव भी पहुंचे थे.
अटल बिहारी बाजपेयी की जयंती यानी कि सुशासन दिवस के मौके पर ‘मजदूरों के हित मजदूरों को समर्पित’ कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़े पीएम मोदी ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया. पीएम मोदी ने कहा कि आपको कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन अब आपके सामने सुनहरे भविष्य की सुबह है. इंदौर के लोग 25 दिसंबर को श्रमिकों को न्याय मिलने के दिन के तौर पर याद रखेंगे.
ये है हुकुमचंद मिल का मामला
हुकुमचंद मिल 1992 में बंद हो गई थी. हुकुंमचंद मिल बंद होने के बाद से ही वहां काम करने वाले मजदूर अपने बकाए रूपए की राशि के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे. मिल मजदूर और बैंकों की देनदारियां 30 सालों तक न्यायालय एवं अन्य प्रक्रिया में लंबित रही. 2022 में पहली बार पहल की गई और गृह निर्माण मंडल को समझौता कर, राशि भुगतान का उत्तरदायित्व दिया गया. हाई कोर्ट ने समझौता प्रस्ताव को सहमति दी. जिसके बाद सीएम डॉ. मोहन यादव ने 19 दिसम्बर 2023 को स्वीकृति प्रदान की।
डबल इंजन की सरकार की नई टीम
कार्यक्रम में जुड़े पीएम मोदी ने कहा कि आज का ये कार्यक्रम हमारे श्रमिक भाइयों-बहनों की वर्षों की तपस्या और उनके कईं वर्षों के सपनों और संकल्पों का परिणाम है. उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि डबल इंजन की सरकार की नई टीम को हमारे श्रमिक परिवारों का भरपूर आशीर्वाद मिलेगा. पीएम मोदी ने कहा मुझे बताया गया है कि जब हुकमचंद मिल के श्रमिकों के लिए पैकेज का एलान किया गया तो इंदौर में उत्सव का माहौल हो गया था.
