: भारत में मकर संक्रांति का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. विभिन्न राज्यों में इसे अलग-अलग तरीकों और नाम से मनाया जाता है. जैसे पंजाब में मकर संक्रांति से पहले की रात को लोहिड़ी मनाई जाती है. वहीं असम में बीहू, दक्षिण भारत में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, यूपी-बिहार में खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है. मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा और खिचड़ी खाने की परंपरा है. इस साल मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी. कई बार मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी को भी पड़ता है. आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति का पर्व कभी 14 तो कभी 15 जनवरी को क्यों पड़ता है? मकर संक्रांति की तारीख
मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है. सूर्य के गोचर या राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है. सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति कहते हैं और इसी दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं. यह दिन सूर्य की कृपा पाने का दिन होता है. क्योंकि सूर्य इस दिन अपने पुत्र शनि के घर यानी कि मकर में आते हैं. साल में एक बार ही ऐसा होता है.
ज्योतिष के अनुसार सूर्य और शनि शत्रु ग्रह हैं. ऐसे में मकर संक्रांति का दिन सूर्य और शनि दोनों की कृपा पाने का दिन होता है. सूर्य हर महीने राशि परिवर्तन करते हैं. कई बार सूर्य का मकर में गोचर 14 जनवरी को होता है तो कभी 15 जनवरी को होता है. ऐसे में जिस दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होता है, उसी दिन मकर संक्रांति मनाते हैं. इस साल सूर्य 15 जनवरी को गोचर करके मकर में आएंगे. मकर संक्रांति के दिन क्या करें क्या ना करें? – मकर संक्रांति का दिन सूर्य देव की कृपा पाने का उत्तम दिन होता है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान करें और सूर्य को अर्घ्य जरूर दें. –
मकर संक्रांति के दिन काली उड़द की दाल, चावल, घी और हरी सब्जियों से बनी खिचड़ी खाएं और दूसरों को खिलाएं. साथ ही तिल-गुड़ का सेवन करें और दान करें. इससे कुंडली के सभी ग्रह शुभ फल देते हैं. साथ ही ग्रहों के दुष्प्रभाव से राहत मिलती है. – मकर संक्रांति के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान जरूर दें. –
