उन्होंने बताया कि सदियों से यह सपना भारतीयों का रहा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लीडरशिप में यह काम होने जा रहा है, भगवान गर्भ गृह में विराजेंगे और यह सभी का सौभाग्य है. उन्होंने कहा कि अयोध्या नगरी विश्व का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल बनने जा रहा है.अयोध्या की मां सीता भोजनशाला में बनने वाली रोटियों के लिए इन मशीनों को रवाना किया गया है. एक बार में इन आठ मशीनों से 1200 चपातियां बनेंगी. उन्होंने कहा कि अजमेर के 50 कार्मिक भी वहां काम कर रहे
सड़क के रास्ते लाई जा रही 108 फीट लंबी अगरबत्तीअयोध्या में 22 जनवरी को रामलला प्राण प्रतिष्ठा उत्सव है. दूसरी ओर कार्यक्रम के लिए 3610 किलो वजनी 108 फीट लंबी अगरबत्ती सड़क मार्ग से गुजरात से अयोध्या ले जाई जा रही है. सोमवार को अगरबत्ती का ट्रेलर भरतपुर के आगरा-जयपुर नेशनल हाईवे होते हुए अयोध्या के लिए रवाना हुआ. कई श्रद्धालु हाईवे पर पहुंचे और जय श्रीराम के जयकारे लगाए. यह अगरबत्ती गुजरात में तैयार की गई है.
इसे बनाने में 6 महीने लगे.बताया जा रहा है कि इसमें कई तरह की जड़ी-बूटियां डाली गई हैं. यह अगरबत्ती करीब डेढ़ महीने तक जलेगी और 50 किलोमीटर के इलाके में खुशबू फैलाएगी. इस अगरबत्ती की चौड़ाई करीब साढ़े तीन फीट है. इसके अलावा श्रीलंका के अशोक वाटिका से चरण पादुका छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ जिले पहुंची, जहां बड़ी संख्या में श्री राम के चरण पादुका के दर्शन करने श्रद्धालु उमड़ पड़े. ये यात्रा राम वन गमन पथ से होते हुए अयोध्या पहुंचेगी. यात्रा का आगाज 15 दिसंबर को हुआ था जो 22 जनवरी को अयोध्या जाकर खत्म हो जाएगी.
मंदिर पुजारी ने बताया कि जब 1990-91 में कार सेवा हुई थी, उस समय हम लोग अयोध्या गये थे और वहां के लोगों को काफी परेशान किया गया. उस समय पुलिस से लाठी भी खानी पड़ी थी. हम भगवान की सेवा करने गए थे. आज चरण पादुका का दर्शन किए हम लोग बहुत खुश हैं. आने वाले 22 जनवरी को मंदिरों और शहर को दीए से सजाएंगे.
