नई दिल्ली : सनातन धर्म एकादशी का व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. हर एकादशी भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होती है. साल के 12 महीने में प्रत्येक महीने एकादशी का व्रत रखा जाता है तो वहीं हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी के नाम से जाना जाता है. एकादशी भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है. एकादशी अपने नाम के अनुसार सभी कार्य में सफलता दिलाने वाली और मनोकामना पूर्ण करने वाली मानी जाती है. इसको लेकर ज्योतिष से बातचीत की.
महंत गंगाराम शास्त्री ने कहा कि एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. मान्यता है जो व्यक्ति इस व्रत को सच्चे मन से करता है, उसे उसके सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है. एकादशी एक व्रत है. जो कई वर्षों पहले शुरू हुआ था. उन्होंने आगे कहा कि एक बार भगवान नारायण विश्राम कर रहे थे और मुंडन नामक राक्षस ने भगवान को युद्ध के लिए चुनौती दी. मुण्डनव को वरदान था कि वह किसी पुरुष से पराजित न हो सकता है. अत: भगवान नारायण ने अपने शरीर के ग्यारह आध्यात्मिक अंगों से एक कन्या को उत्पन्न किया।
एकदशी व्रत करने से पापों से मिलती है मुक्ति
उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यता है कि पांच पाण्डवों में एक भीमसेन ने इस व्रत का पालन किया था और वैकुंठ को गए थे. इसलिए इसका नाम भीमसेनी एकादशी भी हुआ. निर्जला एकादशी व्रत का हिन्दू प्रथा के अनुसार बहुत ही महत्वपूर्ण और कठिन व्रत होता है, इस व्रत में महिलाएं निर्जल रहकर पूरे दिन का उपवास करती है. पूरे दिन कुछ भी सेवन नहीं करती, पुराणों के अनुसार, इस व्रत को जो भी स्त्री पूर्ण करती है उसे मनवांछित फल की प्राप्त होती है सरे दुःख दर्द माँ हर लेती है. कोई भी कठिन परिस्थिति नहीं आती जीवन मैं इस व्रत का इतना महत्त्व होता है.
वैवाहिक एवं कुवारी कन्या भी रख सकती व्रत
निर्जला एकादशी का व्रत कोई भी वैवाहिक एवं कुवारी कन्या रख कर इस फल की प्राप्ति कर सकती है. निर्जला एकादशी का व्रत रखने से इस व्रत के पुण्य प्रभाव एवं मनचाहा वर एवं शक्ति प्रदान होती है. निर्जला एकादशी का व्रत रखने के कुछ बेहद जरुरी नियम होते हैं, जिनको जान लेना अति आवश्यक होता है. इस दिन किसी भी पेड़ से पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए.
गैर-सात्विक भोजन का सेवन न करें
उन्होंने आगे बताया कि निर्जला एकादशी के व्रत के दिन किसी भी तरह का तेल का सेवन वर्जित होता है. इस व्रत के दिन सात्विक भोजन एवं देसी घी में पका कर खाना चाहिए. उन्होंने बताया कि पीतल के बर्तनों में खाना पकाने से आपका भोजन शुद्ध हो जाएगा और आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाएंगे. गैर-सात्विक भोजन का सेवन न करें, निर्जला एकादशी के व्रत के दिन स्त्री, कन्यायों एवं पुरुषों को केवल सात्विक भोजन ही करना चाहिए अन्यथा व्रत का दुष्परिणाम भी देखने को मिल सकता है.
एकादशी के दिन चावल क्यों नहीं खाते
उन्होंने बताया कि इस दिन चावल को जीव के बराबर मानते हैं. क्योंकि शास्त्रों में धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि एक बार महर्षि मेधा ने यज्ञ में आए हुए एक भिक्षु का अपमान किया था. जिसके कारण मां दुर्गा नाराज हो गई और मां दुर्गा को मनाने के लिए महर्षि मेधा ने अपना शरीर त्याग दिया, जमीन में धस गया इससे मां दुर्गा प्रसन्न हो गई और महर्षि को आशीर्वाद दिया, कि उनके अंग भविष्य में अन्न के रूप में उगेगी. इस कारण एकादशी के दिन अन्न चावल और जौ उगा उस दिन एकादशी तिथि थी, इस लिए चावल को जीव माना गया, यही वजह है कि एकादशी के दिन चावल खाना नहीं खाना चाहिए.
