1 फरवरी को सुबह 10.30 बजे देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार छठवीं बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी. बजट कई मायनों में काफी अहम है. विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरिम बजट में भी बड़ी घोषणाएं करने में कोई नियम आड़े नहीं आया. संभावना है कि बजट में इंफ्रा से डिफेंस सेक्टर्स के लिए कुछ ऐलान संभव है. यह भी उम्मीद है कि निर्मला सीतारमण बजट में मध्यम वर्ग और सैलरीड क्लास के लिए कुछ खास तोहफा दे सकती है. आम आदमी की नजर रोजगार पर होगी. ऐसे में कोई योजना भी लाई जा सकती है, जिससे नौकरी के मौके खुलेंगे टैक्स छूट, सस्ते मकान, महंगाई को काबू करना, होम लोन वालों के लिए कुछ रियायत पर भी सबकी निगाहें टिकी होंगी.इनकम टैक्स छूट का इंतजारबजट 2024-25 से सबको इनकम टैक्स छूट का इंतजार रहेगा.
हर बार की तरह इस बार भी टैक्स छूट के लिए सरकार को कईं सिफारिशें मिली हैं. टैक्स के बोझ को कम करने के लिए सरकार भी इनकम टैक्स छूट का ऐलान कर सकती है. माना जा रहा है कि इनकम टैक्स सेक्शन 80C के तहत छूट का दायरा 1.5 लाख रुपए से बढ़ाया जा सकता है. 80C का दायरे बढ़ने से PPF, लाइफ इंश्योरेंस जैसे प्रोडक्ट्स की डिमांड में भी तेजी आ सकती है. साथ ही इस पर टैक्स छूट ज्यादा होगी तो सीधा फायदा मध्यम वर्ग को मिलेगा.अंतरिम बजट और वोट ऑन अकाउंट में अंतरअगर सरकार के पास पूरे साल शासन चलाने का जनादेश नहीं है तो उसे पूरे साल का वित्तीय विवरण पेश करने से बचना होता है.
ऐसी ही स्थिति में सरकार पूर्ण बजट पेश करने के बजाय कुछ महीनों का खर्च चलाने के लिए वोट ऑन अकाउंट पेश करती है. इसे लेखानुदान मांग, अंतरिम बजट और आम भाषा में मिनी बजट भी कहा जाता है. संविधान के अनुच्छेद 116 में इसका प्रावधान है. इसमें सरकार कोई नया टैक्स नहीं लगाती. वैसे भी संविधान के अनुच्छेद 265 में स्पष्ट उल्लेख है कि कानून के प्राधिकार के बिना कोई भी टैक्स नहीं लगाया जा सकता. इसलिए अंतरिम बजट में सरकार विभागवार आवंटन कर बस कुछ महीने का खर्च चलाने के लिए धनराशि की मांग संसद के समक्ष प्रस्तुत करती है. इस तरह सरकार पूर्ण बजट आने से पहले एडवांस में अनुदान लेती है
क्या कहता है नियम?यह समझना जरूरी है कि लेखानुदान, अनुदान की मांगों और अनुदान की पूरक मांगों से भिन्न है. संविधान के अनुच्छेद 115 में अनुदान की पूरक मांगों की व्यवस्था दी गई है. दरअसल जब विनियोग के जरिये निकाली गई राशि किसी कार्य के लिए पर्याप्त नहीं होती है तो सरकार उस कार्य को पूरा करने या नया कार्य शुरू करने के लिए अनुदान की मांग संसद के समक्ष रखती है.सरकार जो भी खर्च करती है उसके लिए वह संचित निधि से राशि निकालती है. ऐसा नहीं है कि बजट पारित होने भर से सरकार संचित निधि से राशि निकाल ले.
इसके लिए सरकार को संसद से विनियोग विधेयक पारित कराना पड़ता है. संविधान के अनुच्छेद 114 के तहत विनियोग विधियेक लोकसभा में पेश किया जाता है. इसके पारित होने के बाद ही सरकार संचित निधि से पैसा निकाल सकती है. संविधान के अनुच्छेद 266 में भारत की संचित निधि और लोकलेखा का जिक्र किया गया है.भारत सरकार जो भी राजस्व प्राप्त करती है, लोन लेती है या लोन की अदायगी प्राप्त करती है, वह पूरा धन इस निधि में जमा होना चाहिए. ऐसी ही निधि राज्यों के लिए भी होती है. इस निधि में से एक भी पैसा विनियोग के बिना नहीं निकाला जा सकता. वैसे जो खर्च सीधे भारत की संचित निधि से होने हैं, उन पर संसद में मतदान की जरूरत नहीं होती.
