*रायपुर:-* आपने देखा होगा कि अधिकतर साइलेंट डेथ रात में ही होती है और कहा जाता है कि इसका टाइम सुबह 3 से 4 बजे होता है. तो जानते हैं आखिर क्या ये सच है?वैसे तो मौत का कोई भी वक्त तय नहीं होता है, लेकिन फिर भी कई रिपोर्ट्स का कहना है कि ज्यादातर साइलेंट डेथ रात के दौरान होती हैं, जबकि सुबह 3 बजे से 4 बजे के बीच का समय सबसे खतरनाक होता है. एक शोध के मुताबिक अस्पताल में ज्यादातर मौतें सुबह 3 बजे से 4 बजे के बीच होती हैं.राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर की वेबसाइट पर छपे एक आर्टिकल के अनुसार, रात में 3 से 4 बजे का वक्त वो समय होता है जब शरीर अगले दिन की गतिविधियों के लिए तैयारी करने की कोशिश करता है.इसके साथ ही मस्तिष्क आगे की इंफोर्मेशन के लिए पुराने डेटा को डिलीट करने की कोशिश करता है. इस समय, एड्रेनालाईन और एंटी-इंफ्लेमेटरी हार्मोन अपने सबसे निचले स्तर पर होते हैं. इसकी वजह से ही शरीर में जाने वाली हवा के रास्ते भी सिकुड़ जाते हैं और ऑक्सीजन में दिक्कत होती है.डेली रिकॉर्ड यूके पर छपी रिपोर्ट के हिसाब से भी इस वक्त अस्थमा के अटैक के चांस भी 300 गुना ज्यादा हो जाते हैं.हार्वर्ड मेडिकल रिसर्च के अनुसार इस समय ही ऐंठन पैदा करने वाले यौगिक भी उच्चतम स्तर पर होते हैं और इस समय एक व्यक्ति के मरने की संभावना अधिक होती है.दूसरी ओर एक धार्मिक उत्तर है जो कहता है कि इस समय आध्यात्मिक दुनिया और पृथ्वी के बीच अंतर बहुत कम है और इस प्रकार किसी के लिए आसानी से दूसरी दुनिया में स्थानांतरित होना आसान है. ऐसे में कहा जाता है कि इस दौरान ज्यादा मौत होती है।
