मध्यप्रदेश:- उत्तर प्रदेश के अयोध्या में रामलला का मंदिर धूमधाम से बन गया. इसके बाद अब जल्द ही बीजेपी मां सीता के मंदिर की पहल कर सकती है. सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो यह मंदिर श्रीलंका में बनाया जाएगा. इसे लेकर मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं. मां सीता मंदिर को लेकर उनका कहना है कि ये निर्णय पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिया था.
उन्होंने कहा कि हम संस्कृति मंत्रालय के माध्यम से इस निर्णय की समीक्षा कर रहे हैं. हम पुरानी योजनाओं पर विचार कर रहे हैं. हम अपने संसाधनों के आधार पर निश्चित रूप से मां सीता के मंदिर की पहल करेंगे. गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मंदिर को श्रीलंका के दिवुरमपोला में बनाने की बात कही थी.
रामायण में जिस अशोक वाटिका का उल्लेख है उसके प्रमाण श्रीलंका में मिलते हैं. नुवारा एलिया की पहाड़ियों में वो पवित्र स्थान भी है जहां माता सीता की अग्नि परीक्षा हुई थी. इस जगह पत्थर पर अग्निपरीक्षा स्थल लिखा है. पहाड़ियों पर हनुमान के चरण चिन्ह भी हैं. श्रीलंका के इस इलाके में रिंग फेस्टिवल भी मनाया जाता है.
यहां तमिल समाज के लोग पोंगल के महीने में उत्सव मनाते हैं. मान्यता है कि अशोक वाटिका में भगवान हनुमान ने सीता माता को श्री राम की अंगूठी दी थी. यह त्योहार उसी आधार पर मनाया जाता है. यह भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक रिश्तों की मजबूत बुनियाद है. इसलिए सीएम यादव का कहना है कि मध्य प्रदेश सरकार सीता माता का भव्य मंदिर बनाने के कई साल पुराने सपने को अमली जामा पहना सकती है.
बता दें, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पास सांची के स्तूप है. यहां हर साल हजारों की संख्या में श्रीलंका से तीर्थयात्री आते हैं. श्रीलंका के दिवुरमपोला में सीता माता का मंदिर बनने पर भारत से तीर्थयात्री वहां जा सकेंगे. इससे दोनों देशों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. बता दें, मध्य प्रदेश सरकार ने बहुत पहले साता मंदिर बनाने के लिए पहल की थी, लेकिन सारा विषय 2016 से ही ठंडे बस्ते में पड़ा है.
मध्य प्रदेश के मुख्यमत्री डॉ. मोहन यादव धार्मिक पहलू से जुड़े मामलों को महत्व देते हैं. हाल में उन्होंने कहा है कि 2028 में कुंभ मेला आने वाला है. इस बार पूरी दुनिया देखेगी कि कुंभ का आनंद कैसा होता है. उन्होंने अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बीच उज्जैन से 5 लाख लड्डू वहां पहुंचाए थे. वे अपने किसी भाषण में भगवान का नाम लेना नहीं भूलते.
