अक्सर देखा जाता है कि जब हम पेट्रोल पंप पर तेल भरवाने के लिए जाते हैं तो पंप कर्मचारी तुरंत जीरो चेक करने के लिए बोलता है. कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां बिना जीरो चेक कराए कर्मचारी तेल भरने लग जाता है. ध्यान ना देने की स्थिति में व्यक्ति अपना नुकसान करा लेता है. इन दिनों पेट्रोल पंप पर धोखाधड़ी के मामले काफी संख्या में सामने आ रहे हैं. यह समस्या इतनी बड़ी हो गई है कि इसकी आवाज देश की संसद तक पहुंच चुकी है. यही कारण है कि संसदीय समिति ने इसके समाधान के लिए अपना सुझाव दिया है. आइए सुझाव के साथ सावधानी बरतने के बारे में कुछ बातें समझ लेते हैं.ये है सरकार का प्लानपेट्रोल पंपों पर ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी हो रही है. उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए संसदीय समिति ने पेट्रोल पंपों को डिस्प्ले स्क्रीन पर ईंधन की मात्रा ठीक से दिखाने का सुझाव दिया है
समिति ने रीटेल दुकानों में उपभोक्ता शिकायत निवारण सिस्टम की सराहना की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उपभोक्ता के अधिकार की हरसंभव तरीके से रक्षा करना अनिवार्य है.
ऐसे करें खुद की रक्षापेट्रोल पंप पर पेट्रोल या डीजल भरवाते समय केवल जीरो चेक करना ही नहीं बल्कि डेंसिटी चेक करना भी बहुत जरूरी है. डेंसिटी से पता चलता है कि फ्यूल कितना प्योर या असली है. पेट्रोल पंप पर मिलने वाले फ्यूल की डेंसिटी सरकार द्वारा तय की गई सीमा के अंदर होनी चाहिए. अगर डेंसिटी निर्धारित सीमा से कम या ज्यादा है, तो इसका मतलब है कि फ्यूल में मिलावट की गई है.ऐसे चेक करें डेंसिटीपेट्रोल की डेंसिटी 730 से 800 किलोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के बीच होनी चाहिए.
अगर डेंसिटी 730 किलोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से कम है, तो इसका मतलब है कि फ्यूल में पानी या किसी दूसरी चीज की मिलावट की गई है. इस तरह आपकी जेब पर डाका डाला जा सकता है. इसके अलावा ऐसा पेट्रोल आपकी कार के इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है.डीजल की डेंसिटी 830 से 900 किलोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के दरम्यान होनी चाहिए. अगर फ्यूल डेंसिटी इस लिमिट के बाहर है तो समझ जाएं कि तेल में मिलावट की गई है.
