नई दिल्ली:- अगर आप नौकरी करते हैं तो आपने अपना सैलरी स्ट्रक्चर तो देखा ही होगा. आपकी हर महीने की सैलरी से EPFO की ओर से चलाई जाने वाली योजना EPF में पैसे जाते हैं. ऑर्गनाइज्ड सेक्टर के कर्मचारियों के लिए EPF में हर महीने 12 फीसदी की कटौती के साथ रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार होता रहता है.
रिटायरमेंट फंड बनाने के अलावा भी EPF के अपने कई फायदे हैं. इनमें से कुछ फायदे हैं जो लगभग सभी कर्मचारी जानते हैं, लेकिन कुछ ऐसी बातें भी हैं, जिनपर या तो लोगों का ध्यान नहीं जाता, या फिर पता ही नहीं होता. हम यहां आपको EPF के ऐसे ही 7 फीचर या फायदे बताने जा रहे हैं.
1. पेंशन का फायदा-
प्रॉविडेंट फंड के तहत आपका पैसा दो हिस्सों में जमा होता है- EPF यानी इंप्लॉई प्रॉविडेंट फंड और EPS यानी इंप्लॉई पेंशन स्कीम. आपकी सैलरी से जो 12 फीसदी कटता है, 12 फीसदी आपकी कंपनी देती है. कंपनी के कॉन्ट्रीब्यूशन से पेंशन कॉर्पस तैयार होता हैं. हालांकि, पेंशन की पात्रता 58 की उम्र के बाद ही होती है, और इसके लिए कम से कम 10 साल की नौकरी होनी चाहिए. मिनिमम पेंशन अमाउंट 1,000 रुपये होती है.
2. नॉमिनेशन का फायदा-
पिछले कुछ टाइम में EPFO ने इस सुविधा के लिए सब्सक्राइबर्स को बार-बार नॉमिनेशन कराने को कहा है. आप अपने EPF अकाउंट से किसी को भी नॉमिनी बना सकते हैं. सब्सक्राइबर्स की मृत्यु पर नॉमिनी को पीएफ के पैसे मिल जाते हैं.
3. VPF में भी निवेश-
कर्मचारी EPF के अलावा, VPF यानी Voluntary Provident Fund में भी निवेश कर सकते हैं. आप अपनी बेसिक सैलरी से एक्स्ट्रा कॉन्ट्रिब्यूशन VPF में डाल सकते हैं.
4. पैसे निकालने के नियम-
EPF से पैसे निकालने के कई नियम हैं. ऐसा नहीं है कि आपने अपनी नौकरी बदली तो आप आराम से ईपीएफ अकाउंट से पैसा निकाल सकते हैं, ऐसा नहीं है. आप तभी EPF का पैसा निकाल सकते हैं, जब या तो आप दो महीनों से नौकरी नहीं कर रहे हों. पैसे भी ट्रांसफर तभी किए जा सकते हैं, जब आप नई नौकरी पा लें.
5. आंशिक निकासी-
इसके अलावा, आंशिक निकासी के भी अपने कई अलग-अलग नियम हैं. आप पूरा पैसा नहीं निकाल सकते, लेकिन अकाउंट से कुछ लिमिट तक पैसे निकाल सकते हैं. अपनी, अपने भाई-बहनों की, अपने बच्चों की शादी या शिक्षा के लिए पैसे निकाले जा सकते हैं, लेकिन अकाउंट शुरू होने के 7 सालों बाद, 50 फीसदी अमाउंट ही निकाल सकते हैं.
अपने और अपने परिवार में किसी की बड़ी सर्जरी या इलाज के लिए भी पैसे निकाले जा सकते हैं. हाउस लोन चुकाने के लिए, घर बनवाने या खरीदने के लिए. या घर रेनोवेट कराने के लिए भी पैसे निकाल सकते हैं.
6. EPF पर ब्याज-
EPF पर आपको हर सालाना ब्याज मिलता है, जोकि कंपाउंड होता रहता है. अभी सरकार आपको EPF पर 8.15% की दर से सालाना ब्याज दे रही है. लेकिन EPS वाले कॉर्पस पर कोई रिटर्न नहीं मिलता है, आपका जितना फंड जमा होता है, उतना ही फंड मिलता है.
7. लाइफ इंश्योरेंस-
अगर किसी कंपनी में लाइफ इंश्योरेंस बेनेफिट नहीं है तो वहां कर्मचारियों को EDLI स्कीम के तहत लाइफ कवरेज दिया जा सकता है. हालांकि, इसमें कवरेज बहुत कम मिलता है.
जानिए ईपीएफ अकाउंट के क्या है नियम
ईपीएफ अकाउंट नियमों के अनुसार जब भी कोई कर्मचारी पीएफ फंड से पैसे निकालते हैं तब उन्हें कुछ शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होता है। आपको बता दें कि पीएफ फंड से पूरी राशि रिटायरमेंट के बाद ही निकाली जा सकती है। ईपीएफओ ने इसके लिए 55 वर्ष निर्धारित किया है। कोई भी कर्मचारी पीएफ फंड से रिटायरमेंट से पहले केवल 90 फीसदी ही राशि निकाल सकते हैं।
अगर किसी इंसान की नौकरी चली गई है तब वह पीएफ फंड से पहली बार में 75 फीसदी और दूसरी बार में पूरी राशि निकाल सकता है। सभी कर्मचारी को इस बात का ध्यान रखना होगा कि पीएफ फंड से पैसे निकालने से पहले उन्हें कुछ दस्तावेज जमा करने होंगे। इसके साथ ही कुछ शर्तों के साथ ही पीएफ फंड से निकासी की जा सकती है।
पीएफ अकाउंट पर कब लगता है टैक्स
बात की जाए ईपीएफ अकाउंट पर टैक्स लगने की तो आपको बता दें कि ईपीएफ अकाउंट पर कोई टैक्स नहीं लगता है। आयकर अधिनियम 80 सी के तहत टैक्स कटौती का दावा किया जा सकता है। अगर कर्मचारी के योगदान पर जो ब्याज मिलता है या फिर कोई और सोर्स से इनकम आती है उन पर टैक्स लगता है।
इसके अतिरिक्त कंपनी द्वारा किये गए योगदान और उस पर मिल रहे ब्याज भी पूरी तरह से कर योग्य होता है। अगर कोई कर्मचारी किसी कंपनी में 5 साल से काम करने से पहले ही पीएफ फंड से पैसा निकालता है तब टीडीएस काटा जाता है। वहीं, अगर वह किसी कंपनी में 5 साल से जॉब करते हैं और उसके बाद पीएफ फंड से पैसे निकालते हैं तब उसपर किसी भी तरह का कोई टैक्स नहीं कटता है।
