बिजनस सॉफ्टवेयर फर्म फ्रेशवर्क्स इंक के फाउंडर और सीईओ गिरीश मातृभूतम एक बार फिर सुर्खियों में हैं। कंपनी के बोर्ड ने उन्हें दिए गए 60 लाख परफॉरमेंस बेस्ड शेयर कैंसल कर दिए हैं। बोर्ड का कहना है कि कंपनी के शेयरों में हाल में आई चुनौती को देखते हुए यह फैसला किया गया है। मातृभूतम को साल 2021 में ये शेयर दिए गए थे। वह सितंबर 2021 में उस समय सुर्खियों में आए थे जब कंपनी के लिस्ट होते ही उनकी कंपनी के 500 कर्मचारी एक झटके में करोड़पति बन गए थे। मातृभूतम की पहचान ऐसे कारोबारी के रूप में है जो कर्मचारियों को सैलरी नहीं बल्कि कंपनी का हिस्सा बांटते हैं। एक नजर गिरीश मातृभूतम के करियर पर…धमाकेदार लिस्टिंगधमाकेदार लिस्टिंगबिजनस सॉफ्टवेयर फर्म फ्रेशवर्क्स इंक ने सितंबर 2021 में अमेरिकी एक्सचेंज नैसडैक (Nasdaq) पर धमाकेदार एंट्री की थी।
कंपनी के 500 कर्मचारी एक झटके में करोड़पति बन गए थे। इसमें से 69 की उम्र तो 30 से भी कम थी। यह नैसडैक में लिस्ट होने वाली भारत की पहली सॉफ्टवेयर एज सर्विस (SaaS) और यूनिकॉर्न कंपनी थी। गिरीश मातृभूतम की इस कंपनी के शेयर ने नैसडैक इंडेक्स पर अपने इश्यू प्राइस से 21 फीसदी प्रीमियम पर एंट्री की थी और इसके साथ ही कंपनी का मार्केट कैप 12 अरब डॉलर के ऊपर पहुंच गया था।
कब हुई थी शुरुआतकब हुई थी शुरुआतफ्रेशवर्क्स की शुरुआत 2010 में हुई थी। तब मातृभूतम और शान कृष्णसामी ने क्लाउड बेस्ड कस्टमर सर्विस सॉफ्टवेयर पर काम शुरू किया था। अपने दोस्तों के बीच जी के नाम से मशहूर मातृभूतम ने तंजौर की शास्त्र यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद जोहो (ZOHO) में काम किया। फ्रेशवर्क्स की स्थापना जब हुई तब तक दुनिया में कई कंपनियां इस सेक्टर में उतर चुकी थीं।
