नई दिल्ली: दुनिया की छठी बड़ी इकॉनमी ब्रिटेन मंदी में फंस चुकी है। लगातार दो तिमाहियों में देश की जीडीपी ग्रोथ में गिरावट आई। अक्टूबर से दिसंबर तिमाही के दौरान इसमें 0.3 फीसदी की गिरावट रही जबकि उससे पहले जुलाई-सितंबर तिमाही में भी इसमें गिरावट दर्ज की गई थी। आधिकारिक आंकड़ों की मानें तो इसकी वजह यह है कि देश के लोग कम खर्च कर रहे हैं। साथ ही डॉक्टरों की हड़ताल और स्कूल में बच्चों की उपस्थिति कम होने से भी इसका सीधा संबंध है। साल 2023 में ब्रिटेन की इकॉनमी 0.1% की रफ्तार से बढ़ी।
अगर कोविड के दौर को छोड़ दिया जाए तो 2009 के बाद यह ब्रिटेन की इकॉनमी का सबसे कमजोर प्रदर्शन है।ब्रिटेन अकेला देश नहीं है जो आर्थिक मोर्चों पर दबाव का सामना कर रहा है। यूरोपियन यूनियन भी 2023 की दूसरी तिमाही में मंदी में फंसने से बाल-बाल बचा है जबकि जापान भी मंदी में फंस चुका है। ब्रिटेन के ऑफिस ऑफ नेशनल स्टैटिस्टिक्स का कहना है कि कई कारणों से पिछले साल देश की इकॉनमी को अंतिम छह महीनों में संघर्ष करना पड़ा।
नवंबर में लोगों ने ब्लैक फ्राइडे का फायदा उठाते हुए जमकर खरीदारी की और दिसंबर में कम खरीदारी की। इसी तरह जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल से हेल्थ सेक्टर प्रभावित हुआ जबकि स्कूलों में अटेंडेंस लेवल में एक फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल के आखिरी तीन महीनों में कंस्ट्रक्शन और मैन्यूफैक्चरिंग समेत सभी मुख्य क्षेत्रों में गिरावट रही।
ब्रिटेन दुनिया की छठी बड़ी इकॉनमी है। फोर्ब्स के मुताबिक अमेरिका 27.974 ट्रिलियन डॉलर के साथ दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी है। चीन 18.566 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे नंबर पर है। जर्मनी हाल में जापान को पछाड़कर दुनिया की तीसरी बड़ी इकॉनमी बना है। उसकी इकॉनमी का साइज 4.730 ट्रिलियन डॉलर है। जापान 4.291 ट्रिलियन डॉलर के साथ चौथे नंबर पर खिसक गया है। भारत 4.112 ट्रिलियन डॉलर के साथ इस लिस्ट में पांचवें और ब्रिटेन 3.592 ट्रिलियन डॉलर के साथ छठे नंबर पर है।
