नई दिल्ली: अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक ने पिछले महीने पहली बार एक मरीज के ब्रेन में चिप लगाई थी। अब मस्क ने बताया कि वह मरीज पूरी तरह ठीक हो गया है और अपनी सोच के जरिये ही कंप्यूटर माउस इस्तेमाल कर पा रहा है। साथ ही चिप इंप्लांट का कोई दुष्प्रभाव भी उस पर नहीं दिखा है।सोशल मीडिया मंच X पर मस्क ने बताया कि ब्रेन चिप इंप्लांट वाला यह पहला इंसानी मरीज अपनी सोच के बल पर माउस चला पा रहा है। प्रगति अच्छी है, ऐसा लगता है कि वह पूरी तरह ठीक हो गया है। मरीज सिर्फ सोचकर स्क्रीन के चारों ओर माउस घुमाने में सक्षम है।
अब न्यूरालिंक इस मरीज से माउस का मैक्सिमम इस्तेमाल यानी ज्यादा से ज्यादा माउस क्लिक कराने का प्रयास कर रही है। हालांकि, खुद कंपनी की तरफ से अभी तक कामयाबी पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। न्यूरालिंक को पिछले साल सितंबर में अमेरिकी FDA से इंसानों में ब्रेन-चिप टेस्ट करने की इजाजत मिली थी।रोबॉट ने लगाई थी चिपन्यूरालिंक ने अपने इस प्रयोग के लिए कुछ वॉलंटियर चुने थे। इनमें से एक मरीज के दिमाग पर रोबॉट ने ब्रेन-चिप लगाई थी। इसे दिमाग के उस हिस्से में लगाया गया, जो हमारे हिलने-डुलने की मंशा को कंट्रोल करता है। न्यूरालिंक का कहना है कि उसका प्राथमिक लक्ष्य मरीजों को केवल अपनी सोच के जरिये कंप्यूटर कर्सर या कीबोर्ड को कंट्रोल करने लायक बनाना है। मस्क के दावे के अनुसार, कंपनी ने इसमें कुछ हद तक कामयाबी पा ली है।
इस कंपनी का लक्ष्य 2030 तक 22 हजार लोगों पर ब्रेन चिप को इंप्लांट करने का है। मस्क का कहना है कि इस ब्रेन-चिप की मदद से मोटापा, डिप्रेशन और स्कित्सोफ्रीनिया जैसी मनोस्थिति का इलाज किया जा सकता है। हालांकि वह पहले लकवाग्रस्त लोगों की मदद करना चाहते हैं।
