नई दिल्ली:- भागदौड़ भरी जिंदगी और लाइफस्टाइल के बदलाव के कारण आज लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही लाइफस्टाइल के बदलाव के कारण हमारी नींद भी अक्सर पूरी नहीं हो पाती है। ये नींद की कमी भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती है। लेकिन आज काम के तनाव और हमारी आदतों के कारण हमारा पूरा स्लीपिंग पैटर्न ही बदल गया है। जिसके कारण हम कई तरह के स्लीपिंग डिसऑर्डर के शिकार हो रहे हैं। जिसमें एक समस्या स्लीपिंग पैरालिसिस शामिल है। कभी नींद में ऊंचाई से गिरना, कभी गहरे पानी में डूबने या किसी करीबी की मौत ऐसी कई डरावनी चीजें रोज देखना किसी के लिए भी डराने वाला हो सकता है। लेकिन कुछ लोगों को यह समस्या काफी गंभीर रूप ले सकती है। जिसमें उन्हें फील होता है कि उनकी छाती को कोई दबा रहा है, या वह बोल नहीं पा रहे हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ऐसे संकेत स्लीप पैरालिसिस के हो सकते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से…
क्या है स्लीप पैरालिसिस
यह एक ऐसा स्लीपिंग डिसऑर्डर है जिसमें आप ऐसा महसूस करते हैं कि आप नींद से जाग चुके हैं, लेकिन फिर भी कोई काम कर नहीं पाते हैं। इस स्थिति में आप लाख कोशिश करने के बाद भी अपने हाथ-पैर तक नहीं हिला पाते हैं। यदि आपने कभी ऐसी स्थिति को महसूस किया है तो यही स्लीप पैरालिसिस कहा जाता है। साफ शब्दों में कहें तो ऐसी स्थिति जिसमें मनुष्य का दिमाग तो नींद से जाग चुका होता है लेकिन उसका शरीर अभी भी सो रहा होता है। आपको यह समस्या गहरी नींद में जाने से पहले या नींद खुलने के कुछ देर पहले हो सकती है।
स्लीप पैरालिसिस के कारण
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो स्लीप पैरालिसिस एक तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्या है। जो सोते समय महसूस की जाती है। इस समस्या का प्रभाव किशोरावस्था में अक्सर बढ़ते देखा गया है। इसके पीछे के कारण निम्नलिखित हैं।
नींद की कमी होना।
स्लीपिंग पैटर्न में बदलाव।
मादक पदार्थों का सेवन करना।
दिमाग पर अधिक दबाव आना।
बहुत अधिक तनाव होना।
पैनिक डिसऑर्डर।
बचाव के उपाय
लगातार कम से कम 7-8 घंटे की नींद लेना है जरूरी।
सोने से 2 घंटे पहले मोबाइल या लैपटॉप आदि न देखें।
सोने और जागने का समय करें फिक्स।
कम रोशनी और शांत वातावरण वाले कमरे में सोएं।
धूम्रपान, शराब या कैफीन जैसे मादक पदार्थों का सेवन करने से बचें।
नियमित तौर पर व्यायाम करें।
दिमाग को एकाग्र और शांत करने के लिए रोजाना ध्यान का अभ्यास करें।
