पिछले एक साल में सात सरकारी बैंकों ने बंपर 7 लाख करोड़ रुपए छाप डाले हैं. लेकिन, अब इन PSU बैंकों के शेयर की रैली में एक महत्वपूर्ण मोड़ आने वाला है. SEBI ने MPS के लिए अगस्त तक की डेडलाइन तय की है जो अब नजदीक आ रही है. ऐसे में आइए जानते हैं इन बैंकों के शेयर में अब क्या होगा.SEBI MPS Deadline: 7 सरकारी बैंकों ने एक साल में छाप डाले 7 लाख करोड़, अब आगे क्या होगा?7 सरकारी बैंकों ने एक साल में छाप डाले 7 लाख करोड़, अब आगे क्या होगा?.
इनमें से सात सरकारी बैंकों ने 100% से भी ज्यादा रिटर्न दिया है. डाटा के मुताबिक, पिछले एक साल में सात सरकारी बैंकों ने 7 लाख करोड़ रुपए छाप डाले हैं. लेकिन, अब इन PSU बैंकों के शेयर की रैली में एक महत्वपूर्ण मोड़ आने वाला है. दरअसल, SEBI ने सरकार से कहा था कि मिनिमम पब्लिक शेयर होल्डिंग यानी एमपीएस नियमों के तहत उन्हें इन शेयरों में अपनी हिस्सेदारी को 75 फीसदी घटाना होगा. बता दें, SEBI ने MPS के लिए अगस्त तक की डेडलाइन तय की है जो अब नजदीक आ रही है. ऐसे में देखना ये होगा कि SEBI के एक फैसले से इस रैली पर क्या असर होता है
.क्या है मामला?सेबी के मुताबिक, सभी लिस्टेड कंपनियों को 25 फीसदी का एमपीएस बनाए रखना होगा. हालांकि, नियामक ने राज्य के स्वामित्व वाले बैंकों को स्पेशल एक्सटेंशन दिया था. उनके पास 25 प्रतिशत एमपीएस की आवश्यकता को पूरा करने के लिए अगस्त 2024 तक का समय है.किस बैंक के पास कितनी हिस्सेदारी?ज्यादातर सरकारी बैंकों में सरकार की पर्याप्त हिस्सेदारी है, पंजाब एंड सिंध बैंक (PSB) और इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) में 98.25% और 96.38% सरकारी हिस्सेदारी है. सरकारी बैंकों के शेयर में आई रैली के पीछे का एक कारण कम फ्री फ्लोट है
