उत्तरप्रदेश:- बीजेपी उत्तर प्रदेश में 75 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने जा रही है. वहीं पांच सीटें सहयोगी दलों, आरएलडी, अपना दल और ओपी राजभर की सुभाषपा को दी गई हैं. ज्यादातर सीटों पर बीजेपी ने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है लेकिन उत्तर प्रदेश की हाई प्रोफाइल सीट रायबरेली और कैसरगंज पर अब तक पार्टी ने अब तक पत्ते नहीं खोले हैं. इन सीटों पर सस्पेंस अब तक जारी है. बीजेपी रायबरेली सीट पर उम्मीदवार उतारने से पहले आखिर किस बात का इंतजार कर रही है? इस सवाल का जवाब यह है कि बीजेपी कांग्रेस पर नजरें गड़ाए है. वहीं कैसरगंज सीट पर ब्रजभूषण शरण सिंह की खराब हुई छवि की वजह से पार्टी कश्मकश में नजर आ रही है.
रायबरेली में BJP को किस का इंतजार
अब तक सोनिया गांधी इस सीट से जीतकर लोकसभा जाती रही हैं. इस बार उन्होंने चुनाव न लड़ने का ऐलान पहले ही कर दिया था. यह जिताऊ सीट गांधी परिवार के हाथ से चली जाए, ये तो संभव नहीं लगता. इस बात का अंदाजा तो सोनिया गांधी के उस रायबरेली के नाम लिखे उसे खत से भी लगाया जा सकता है, जिसमें उन्होंने यहां के लोगों से गांधी परिवार पर आशीर्वाद बनाए रखने का भरोसा जताया था. तो ऐसा में राहुल या प्रियंका गांधी को इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार बना सकती है. बीजेपी यही देखना चाहती है कि क्या गांधी परिवार का कोई शख्स रायबरेली सीट से चुनाव लड़ेगा या नहीं.
राहुल या प्रियंका? रायबरेली से कौन लड़ेगा चुनाव
बीजेपी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रायबरेली से राहुल गांधी या फिर प्रियंका गांधी कौन चुनाव लड़ सकता है. इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार का नाम सामने आने के बाद बीजेपी उसी हिसाब से अपनी रणनीति तय करेगी, या यूं कहें कि उनका मुकाबला करने वाला उम्मीदवार तय करेगी. हाालांकि बीजेपी की तरफ से रायबरेली में दिनेश प्रताप सिंह या मनोज पांडे के नामों की चर्चा तेज है. लेकिन आखिरी फैसला पार्टी कांग्रेस के पत्ते खुलने के बाद ही लेना चाहती है. यही वजह है कि रायबरेली सीट पर अब तक बीजेपी का सस्पेंस जारी है.
कैसरगंज में ब्रज भूषण या कोई और
वहीं कैसरगंज सीट पर भी अब तक बीजेपी ने पत्ते नहीं खोले हैं. वैसे तो इस सीट पर मौजूदा सांसद ब्रज भूषण शरण सिंह का दबदबा माना जाता है. लेकिन बीजेपी ने अब तक उनके नाम का ऐलान नहीं किया है. जिसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी ब्रज भूषण का टिकट इस सीट से काट सकती है. ब्रज भूषण के परिवार को टिकट देने पर भी अभी तक सस्पेंस की स्थिति है. पेंच यह है कि बीजेपी अगर मौजूजा सांसद ब्रज भूषण का टिकट काटती है तो उसे अंदरूनी संकट का सामना करना पड़ सकता है. यही वजह है कि पार्टी ने अब तक अपने पत्ते कैसरगंज सीट पर नहीं खोले हैं.
कैसरगंज में बीजेपी के सामने कौन सा पेंच
अगर बीजेपी कैसरगंज से ब्रज भूषण का टिकट काटती है तो उसकी बड़ी वजह पिछले दिनों उनकी छवि को नुकसान पहुंचना हो सकती है. दरअसल पहलवानों के गंभीर आरोपों और धरना प्रदर्शन के बाद बीजेपी को उन्हें कुश्ती फेडरेशन से भी हटाना पड़ा था. उन पर लगे यौन शोषण के आरोपों के बाद इसे विपक्ष बड़ा मुद्दा बनाकर चुनाव में भुनाने की कोशिश कर सकती है. यही वजह है कि इस सीट पर मुकाबला पहले से ज्यादा कड़ा हो गया है और बीजेपी के लिए यह सीट बड़ी चुनौती बन गई है. माना जा रहा है, यही वजह है कि बीजेपी ब्रज भूषण को इस लोकसभा चुनाव कैसरगंज से टिकट देने के मूड में नहीं है. बीजेपी ने अब तक ब्रज भूषण को न ही इस सीट से दोबारा उम्मीदवार घोषित किया है और न ही कोई और नाम ही अब तक सामने आया है!
