नई दिल्ली:- हर शुक्रवार के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही धन प्राप्ति एवं संकटों से मुक्ति हेतु लक्ष्मी वैभव व्रत रखा जाता है। इस व्रत के पुण्य प्रताप से व्रती को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही आय और आयु में भी वृद्धि होती है। अतः साधक श्रद्धा भाव से धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-उपासना करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि धन की देवी मां लक्ष्मी हमेशा विद्वान लोगों से अप्रसन्न रहती हैं ? इसकी जानकारी आचार्य की नीति शास्त्र से मिलती है। आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं
आचार्य चाणक्य अपनी नीति शास्त्र के 15वें अध्याय के सोलहवें श्लोक में जगत के पालनहार भगवान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की वार्ता का वर्णन करते हैं। इसमें भगवान विष्णु, धन की देवी मां लक्ष्मी से कहते हैं- हे देवी! आप विद्वानजनों या ब्राह्मणों से क्यों हमेशा नाराज रहती हैं ? इस प्रश्न पर ममता की देवी मां लक्ष्मी कहती हैं- हे नाथ! आप सर्वज्ञाता हैं। आप सबकुछ जानते हैं। अगस्त ऋषि ने मेरे पिता समुद्र को पी लिया था, ब्राह्मण भृगु ने क्रोध में अभिभूत होकर आपके छाती पर लात दे मारी थी। ब्राह्मण के बच्चे बचपन से मेरी सौत शारदे की पूजा कर प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। यही नहीं, शिवभक्त ब्राह्मण कमल तोड़कर मेरे निवास स्थान को उजाड़ देते हैं। इसके लिए मैं ब्राह्मणों एवं विद्वानों से नाराज या दूर रहती हूं।
