नई दिल्ली:- चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन हनुमान जयंती होती है, जो कि इस बार मंगलवार, 23 अप्रैल को मनाई जा रही है। ऐसे में अगर आप भी दिल्ली एनसीआर या इसके आसपास के इलाकों में रहते हैं और इस विशेष दिन पर बजरंगबली का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो ये आर्टिकल आप ही के लिए है। यहां हम आपको दिल्ली के ऐसे 5 प्राचीन हनुमान मंदिरों के बारे में बताएंगे, जिनका दर्शन करके आप भी इस दिन को यादगार बना सकते हैं
दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में स्थित इस हनुमान मंदिर के स्वरूप में अब तक कई बदलाव हो चुके हैं, लेकिन खास बात ये है कि यहां स्थापित भगवान हनुमान की मूर्ति महाभारत काल के समय की है। कहा जाता है कि पांडवों ने ही इस मंदिर की स्थापना की थी। ऐसे में हनुमान जयंती पर दर्शन करने के लिए आप यहां विजिट कर सकते हैं।
दिल्ली के करोल बाग में स्थित हनुमान जी का मंदिर भी काफी प्राचीन है। यहां मौजूद भगवान हनुमान की प्रतिमा करीब 108 फीट ऊंची है। करोल बाग और झंडेवालन के आसपास से गुजरते हुए या कई टीवी सीरियल के सीन में आपने इस मूर्ति का दीदार जरूर किया होगा। इस भव्य मंदिर का दर्शन करने के लिए भी लोग दूर-दूर से आते हैं।
दिल्ली के यमुना बाजार में बना मरघट वाले बाबा का मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। हर मंगलवार और शनिवार यहां भक्तों का तांता लगा ही रहता है। यमुना नदी के किनारे स्थित इस मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति जमीन से करीब 10 फीट नीचे हैं। हनुमान जयंती पर यहां दर्शन करके भी आप मन की शांति पा सकते हैं। मान्यता है कि रामायण काल में जब हनुमान जी लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लेकर जा रहे थे, तब इसी जगह विश्राम करने के लिए रुके थे।
दिल्ली के चाणक्यपुरी में विनय मार्ग पर स्थित हनुमान जी का मंदिर भी काफी प्राचीन मंदिरों में से एक है। इसके पास ही श्री बटुक भैरव का मंदिर भी है, ऐसे में आप एक ही साथ दोनों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। आस्था ऐसी है कि रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां मन्नत लेकर आते आते हैं। हनुमान जयंती पर यहां विजिट करना भी एक बढ़िया फैसला होगा।
दिल्ली के रोहिणी में स्थित श्री बालाजी बाबोसा मंदिर भी काफी खास है। कई भक्त यहां विराजमान हनुमान जी को भगवान विष्णु और श्री कृष्ण के रूप में भी पूजते हैं। साथ ही, यह मंदिर हनुमान जी के बाल रूप की आराधना करने के लिए विशेष महत्व रखता है। यहां विजिट करने के लिए हनुमान जयंती के पावन मौके से ज्यादा बेहतर दिन भला और क्या हो सकता है।
