नई दिल्ली:- आपको बता दे कि जनेऊ तीन धागों वाला एक सूत्र होता है, जिसे संस्कृत में यज्ञोपवीत कहा जाता है। हिंदू धर्म में जनेऊ संस्कार को जरूरी माना जाता है। साथ हिंदू शास्त्रों में इसके कई लाभ भी बताए गए हैं। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है बल्कि, वैज्ञानिक दृष्टि से भी लाभकारी है। लेकिन व्यक्ति द्वारा जनेऊ से जुड़े कुछ नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी माना गया है।
जनेऊ तीन धागों वाला एक सूत्र होता है, जिसे अपने बाएं कंधे के ऊपर से दाईं भुजा के नीचे तक पहना जाता है। यज्ञोपवीत के एक तार में तीन-तीन तार होते हैं। इस तरह जनेऊ में कुल नौ तार होते हैं, जो शरीर के नौ द्वार का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं, इसमें लगाई जाने वाली पांच गांठ ब्रह्म, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रतीक मानी गई हैं।
माना जाता है कि जनेऊ धारण करने से व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है। कहा जाता है कि जनेऊ पहनने वाले से नकारात्मकता दूर बनी रहती है और उसके आसपास बुरी शक्तियों नहीं आती। साथ ही यह भी माना जाता है कि जनेऊ धारण करने वाले व्यक्ति को बुरे सपने नहीं आते और जीवन में सकारात्मक बनी रहती है।
जनेऊ से जुड़े नियमों का भी विशेष रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि इसकी पवित्रता बनी रहे। मल-मूत्र विसर्जन के पूर्व दाहिने कान पर चढ़ा लें और हाथों को धोने के बाद ही इसे कान से उतारना चाहिए। यदि जनेऊ का कोई तार टूट गया है, तो इसे बदल लें।
