नई दिल्ली :- ऋषिकेश में कई सारे मंदिर स्थापित है. हर मंदिर की मान्यता और अपना इतिहास है. वहीं यहां भगवान शिव के कई सारे प्राचीन मंदिर स्थापित हैं. उन्हीं में से एक मंदिर जिसके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं वह नर्मदेश्वर लाल मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है. यह मंदिर ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट के पास ही गंगा के तट पर स्थित है.
लोकल 18 के साथ बातचीत में महंत राधा पुरी ने बताया कि यह मंदिर ऋषिकेश में पावन गंगा के तट पर स्थित है, जिसे सभी नर्मदेश्वर महादेव के नाम से भी जानते हैं. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. यहां स्थापित शिवलिंग एक स्वयंभू शिवलिंग है, जो कि स्वयं नर्मदा नदी से निकला हुआ है. यह शिवलिंग ओंकारेश्वर के पास स्थित धावड़ी कुंड जिसमें नर्मदा का वास है, वहीं से प्रकट हुआ है. इसीलिए इसे नर्मदेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है. साथ ही इसका इतिहास लगभग 100 साल से ज्यादा पुराना है. यह मंदिर ऋषिकेश के प्रसिद्ध व प्राचीन मंदिरों में से एक है, इसीलिए यहां दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ रहती है.
महंत राधा पुरी ने बताया कि नर्मदा नदी भगवान शिव की पुत्री मानी जाती है, पुराणों के अनुसार भगवान शिव से ही नर्मदा नदी की उत्पत्ति हुई है. इसीलिए इस नदी से उत्पन्न शिवलिंग का अपने आप में ही विशेष महत्व है. साथ ही जो भी भक्त इस शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं या रुद्राभिषेक करते हैं भगवान शिव उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. अगर आप ऋषिकेश घूमने आए हैं या फिर आने की सोच रहे हैं, तो इस मंदिर के दर्शन जरूर करें. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस मंदिर के पट प्रातः 5 बजे खुल जाते हैं और शाम 7 बजे के करीब संध्या आरती होती है।
