नई दिल्ली :- लल्ला की सेवा विधि तो बहुत साधारण है, आप उन्हें अपने छोटे बालक को जिस तरह से रखते हैं, उस तरह से उन्हें रख सकते हैं। लड्डू गोपाल की सेवा और पूजा में उन्हें तुलसी पत्र और मंजरी जरूर अर्पित की जाती है। लड्डू गोपाल की पूजा बिना तुलसी के अधूरी मानी गई है, उनकी पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी गई है। ऐसे में हर कोई उन्हें स्नान के बाद मस्तक मेंतुलसी पत्र जरूर अर्पित करते हैं, इसके अलावा उनके भोग में भी तुलसी पत्र डालकर अर्पित की जाती है। आपको बता दें कि भगवान श्री कृष्ण को तुलसी पत्र अर्पित करने के कुछ नियम है, जिसके बारे में बहुत से लोगों को नहीं पता है। अनजाने में लोग लड्डू गोपाल को तुलसी पत्र अर्पित करते वक्त इन गलतियों को जरूर दोहराते हैं, जिससे उन्हें पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता है। ऐसे में आज हम आपको लड्डू गोपाल को तुलसी पत्र अर्पित करने की सही विधि पंडित शिवम पाठक जी से जानेंगे।
बहुत से लोग लड्डू गोपाल को तुलसी के पत्र टुकड़ों में तोड़ कर अर्पित करते हैं। बता दें कि लड्डू गोपाल को साबुत तुलसी पत्र अर्पित की जाती है। इसलिए कभी भी लड्डू गोपाल को तुलसी पत्र अर्पित करते वक्त उसे टुकड़ों में न तोड़ें। हमेशा तुलसी के ताजे पत्ते तोड़कर उसे लड्डू गोपाल के मस्तक पर चिपकाएं।
लड्डू गोपाल को कभी भी बासी तुलसी के पत्र अर्पित न करें। लड्डू गोपाल को बासी तुलसी सिर्फ एकादशी और रविवार के अवसर पर ही आप लड्डू गोपाल को एक दिन पहले तोड़े हुए तुलसी के मंजरी और पत्र अर्पित करें।
लड्डू गोपाल को कभी भी सूखी तुलसी या तुलसी को सुखाकर उसे चुरा बनाकर अर्पित न करें। बहुत से लोग तुलसी को सुखाकर रखते हैं और उसे अर्पित करते हैं। बता दें ऐसी तुलसी लड्डू गोपाल को नहीं चढ़ाना चाहिए।
लड्डू गोपाल को हमेशा साफ और ताजी तुलसी के पत्ते अर्पित करें।
लड्डू गोपाल को चढाई जाने वाली तुलसी कटे फटे न हो।
अक्सर तुलसी के पौधे में कीड़े लग जाते हैं, जो पत्तों में छेद कर देते हैं, ऐसी तुलसी भी लड्डू गोपाल को अर्पित न करें।
लड्डू गोपाल को चढ़ाने के लिए तुलसी के पत्र रविवार और एकादशी के दिन नहीं तोड़ना चाहिए इसलिए आप शनिवार और दशमी तिथि के दिन तुलसी पत्र तोड़कर रखें और दूसरे दिन अर्पित करें।
