नई दिल्ली:- चार मई 2024 की शाम जम्मू-कश्मीर के पुंछ में आतंकवादियों ने भारतीय वायुसेना के काफिले पर हमला किया. आतंकी हमले में एक जवान शहीद हो गया. चार घायल जवानों का इलाज जारी है. बीते कुछ सालों में देश में आतंकवाद की कमर टूटी है. लेकिन ये समस्या जड़ से खत्म नहीं हुई है. अंग्रेजों की गुलामी से 1947 में आजादी मिलने के बाद से ही देश आतंकवाद का शिकार रहा है. 77 सालों में आतंकवाद ने भारतमाता और हमारे वीर जवानों के सीने को कई बार गोलियों से छलनी किया है. भारतीय सेना, सुरक्षा बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस लगातार आतंकियों का सफाया कर रही है. इसके बावजूद आतंकवाद को कोई पुख्ता इलाज नहीं मिल सका है. अब सवाल उठता है कि आखिरकार आतंकी हमलों में हमारे जवानों की शहादत आखिर कब तक होती रहेगी?
भारत में आतंकी हमलों का पुराना इतिहास
जम्मू-कश्मीर से लेकर पंजाब, महाराष्ट्र से लेकर पश्चिम बंगाल और नॉर्थ-ईस्ट से लेकर दक्षिण भारत तक शायद ही कोई ऐसा प्रदेश हो जिसने कभी न कभी आतंकवाद का दंश न झेला हो. खासकर सीमावर्ती राज्यों जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अपना नेटवर्क मजबूत करने की कोशिश की इसलिए यहां ज्यादा नुकसान पहुंचा.
साल 2023 जम्मू-कश्मीर के लिए खास और आतंकवादियों का काल साबित हुआ. पिछले साल आतंकवादी हमलों में भारी गिरावट आई, तो वहीं बड़ी संख्या आतंकवादी और उनके सहयोगी पुलिस के हत्थे चढ़े. आतंकी फंडिग कम हुई है. पत्थरबाजी की घटानाएं बंद हो गई है. पुलिस के जवान भी कम शहीद हुए. सरकारी आंकड़ो के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में 2023 में कुल 48 एंटी टेररिस्ट ऑपरेशन चलाए गए. इनमें 76 आतंकवादी ढेर हुए. बड़ी बात ये है कि मारे गए 76 आतंकवादियों में से 55 दूसरे देश के थे. जम्मू-कश्मीर के डीजीपी आरआर स्वैन ने 30 दिसंबर की एक प्रेस कांफ्रेंस मे ये डाटा जारी किया था.
डीजीपी के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर ने 2023 में आतंकवादी हमलों में बड़ी कमी देखी. साल 2022 में 125 आतंकी घटनाएं हुईं, वहीं 2024 में ये आंकड़ा 46 रहा. इस तरह आतंकी घटनाओं में 2023 में करीब 63% की कमी आई.
स्थानीय लोग आतंकवादियों का साथ छोड़ रहे- पुलिस को भी हुआ कम नुकसान
2023 में आतंकी भर्ती में भी करीब 80% गिरावट हुई. एक अनुमान के मुताबिक साल 2022 में 130 स्थानीय लोग आतंकी गतिविधियों में शामिल थे. 2023 में यह संख्या सिर्फ 22 रह गई. 2023 में जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक DSP समेत 4 पुलिसकर्मी आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए शहीद हुए, जबकि 2022 में पुलिस के 14 जवान शहीद हुए थे. अगर आम लोगों की हत्या की बात करें तो इसमें भी 2022 की तुलना में कमी आई. 2022 में आतंकवादियों ने 31 आम नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया था. 2023 में 14 लोग आतंकवादियों के शिकार बने. 2024 के शुरुआती पांच महीनों में ये आंकड़ा कम हुआ है. हालांकि टारगेट किलिंग में कुछ लोगों की हत्या हुई है.
एक अनुमान के मुताबिक इतने आतंकियों का खात्मा बाकी
जम्मू-कश्मीर में 2023 में पुलिस ने 31 लोकल आतंकवादियों की पहचान की थी. इनमें से 4 आतंकवादी जम्मू के किश्तवाड़ में तो 27 आतंकवादी कश्मीर इलाके में एक्टिव थे. हालांकि जम्मू क्षेत्र के राजौरी और पुंछ जिलों में 2023 में आतंकवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई. पुलिस के इनपुट के मुताबिक 2024 में भी राजौरी और पुंछ जिलों में खास चौकसी बरती जा रही है. यहां लगातार सर्च ऑपरेशन चल रहे हैं.
सरकार ने आतंकवाद के खात्में पर क्या कहा
पुंछ में एयरफोर्स के काफिले पर हुए हमले में पांच जवान घायल हुए थे. एक ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. सेना का कहना है हमारे जवानों की शहादत बेकार नहीं जाएगी. केंद्र सरकार ने 2023 में कहा गया था कि जल्द ही देश से आतंकवाद और नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ कर फेंक दिया जाएगा. गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की कोशिशें रंग ला रही हैं. ऐसे में माना जा सकता है कि जल्द ही वो दिन आएगा जब हमारे एक भी जवान की शहादत बेहार नहीं जाएगी।
