नई दिल्ली :- सिरोही जिले की अरावली की पहाड़ियों में गर्मियों में कई पेड़ों पर पीले व नारंगी रंग की गेंद जैसा दिखने वाला फल स्वाद के साथ सेहत के लिए भी काफी गुणकारी है. जी हां हम बात कर रहे हैं तेंदू या टिमरू के फल की. गर्मियों में आदिवासी क्षेत्र से महिलाएं पेड़ों से ये फल तोड़कर बाजार में बेचने आती है. टिमरू के पत्ते बीड़ी बनाने के काम में भी आते हैं. इसे जंगल का चीकू भी कहा जाता है. अरावली पर्वतमाला में प्रचुर मात्रा में मिलने के कारण यह आदिवासी परिवारों के आय का स्रोत भी बना हुआ है. बाजार में इन दिनों टिमरू काफी बिक रहे हैं. गर्मी में ये फल सेहत के लिए काफी लाभदायक होता है.
60-70 रुपए प्रति किलो बिकता है फलबाजार में आदिवासी महिलाएं टोकरे में इसे बेचने के लिए आती है. बाजार में ये 60-70 रुपए प्रति किलोग्राम भाव से बिक रहा है. महिलाएं ये फल बेचकर दिनभर में 400-500 रुपए कमा लेती है. इस फल के अंदर का भाग खाने में उपयोग होता है. इसका स्वाद मीठा होने के कारण काफी लोग इसको खरीदते हैं.
डायबिटीज व वजन घटाने में कारगर टिमरू फल ह्रदय रोगी, डायबटीज व शरीर की सूजन कम करने के साथ ही वजन घटाने में भी कारगर साबित होता है. आयुर्वेद विभाग के सेवानिवृत उप निदेशक व वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. केशव भारद्वाज ने बताया कि तेंदू या टिमरू का फल मीठा होने के बावजूद मधुमेह के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है.कोलेस्ट्रॉल, घुटनो में दर्द, पेट से सम्बंधित परेशानियों में यह फल बहुत कारगर होता है. इसमें नेचुरल फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं।
