मध्यप्रदेश :- शहर से लगे उमरी -अगडालमें इन दिनों भक्ति रस की गंगा बहाई जा रही है यहां पर श्री राम कथा का आयोजन किया गया है कथा के पांचवें दिन कथा वाचक श्री श्री 108 रामानुजाचार्य राजगुरु दो बद्री प्राचार्य आचार्य आश्रम चित्रकूट धाम ने कथा को आगे बढ़ते हुए कहा कि जिस तरह पीतल के घड़े में गंगाजल भरेंगे तभी उसमें शीतलता प्रकट होगी हमारा मन राम तत्व से संपूर्ण होगा तभी हृदय में भगवान विराजमान होंगे
उन्होंने कहा की कथा श्रवण मात्र से भगवान हमारे चित्र में विराजमान होते हैं उन्होंने कहा कि श्री राम कथा एक आदर्श स्थापित करती है जो सब का हिट करती है उन्होंने बताया कि यह परमहंस मुनियों की कथा है जो हमें धर्म सिखाती है मानस सिखाती है उन्होंने बताया कि दुष्ट का धर्म अलग है और सज्जनता का धर्म अलग है रामचरितमानस हमें धर्म पर चलना सिखाती है इसलिए हमें निज धर्म पर चलना है मनुष्य के धर्म का उद्देश्य क्या है यह रामचरितमानस बताती है
उन्होंने कहा कि अगर आपको भगवान से मिलना है तो मानव बनना पड़ेगा मानव चारित्रिक दोष को दूर कर सकता है मानस में सत्य और आनंद तीनों चीज है इसलिए यह तीन गुना का दर्शन करता है इस अवसर पर कथा श्रवण के लिए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेश शुक्ला भी पहुंचे और कथा का भरपूर आनंद उठाया.
