नई दिल्ली:- दुनियाभर में एक बार फिर से काली खांसी का प्रकोप बढ़ रहा है। हाल ही में आई खबर के मुताबिक, अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों में इस बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2023 की सर्दियों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ अजीब नोटिस किया। यूरोप में काली खांसी के मामले तेजी से बढ़ रहे थे। सिर्फ यूरोप ही नहीं, अमेरिका में भी काली खांसी के मामलों में वृद्धि देखी गई।
यूरोप सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल के मुताबिक, जनवरी और मार्च 2024 के बीच पूरे यूरोप में काली खांसी के लगभग 32,000 मामले दर्ज किए गए। ईसीडीसी के अनुसार, यूरोप में काली खांसी के मामलों का वार्षिक औसत 38,000 है। यदि ऐसा ही जारी रहा तो सामान्य वर्ष की तुलना में 2024 में काली खांसी के मामले लगभग 10 गुना बढ़ सकते हैं।
क्या है काली खांसी
काली खांसी को वूपिंग कफ या पर्टुसिस भी कहा जाता है। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, काली खांसी बैक्टीरियम बोर्डेटेला पर्टुसिस के कारण होती है। यह हमारे अपर रेस्पिरेटरी सिस्टम पर अटैक करता है और टॉक्सिंस छोड़ता है, जिससे वायु मार्ग में सूजन हो सकती है।
काली खांसी के लक्षण
काली खांसी के शुरुआती लक्षण काफी हद तक सामान्य सर्दी की तरह दिखते हैं, जिसकी वजह से इस बीमारी का पता तब तक लगा पाना मुश्किल है जब तक इसके गंभीर लक्षण सामने ना आएं। इसके सामान्य लक्षण में हल्की खांसी, नाक बंद होना और हल्का बुखार शामिल है। एक से दो हफ्ते बाद लक्षण गंभीर हो सकते हैं और बहुत तेज और अनियंत्रित खांसी के दौर में बदल सकते हैं, जो 10 हफ्ते तक चल सकते हैं। इसके अलावा, सांस लेने पर हूप की आवाज आ सकती है।
कैसे करें बचाव
काली खांसी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है। डीटीएपी वैक्सीन आमतौर पर 2 महीने की उम्र से शिशुओं और छोटे बच्चों को कई डोज में दिया जाता है। किशोरी और वयस्कों के लिए टीडीएपी नमक बूस्टर वैक्सीन के सलाह दी जाती है।
हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोएं।
अपने बर्तन, टॉवेल और अन्य व्यक्तिगत सामान दूसरों के साथ शेयर न करें।
खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिशू या कोहनी से ढकें।
खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण नजर आने पर सार्वजनिक जगहों पर जाने से बचें।
काली खांसी के लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
