नई दिल्ली:- 4 जून को मतगणना की जाएगी, जिसके बाद देश को नई सरकार मिल जाएगी। एक महीने से भी अधिक समय तक चला चुनावी अभियान काफी आक्रामक रहा और पक्ष एवं विपक्ष की ओर से लगातार एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने का दौर जारी रहा।
इस दौरान विपक्षी पार्टियों की ओर से उठाए गए कुछ मुद्दों की चर्चा पूरे चुनाव में रही। वहीं, विपक्ष के कुछ बयान ऐसे भी रहे, जो उन्हीं पर भारी पड़े और बाद में उन्हें सफाई देनी पड़ी। आइए जानते हैं कि विपक्ष के चुनावी अभियान में किन मुद्दों की गूंज रही।
विपक्षी दलों के इंडी गठबंधन की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव, और आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने ‘तानाशाही से राष्ट्र, संविधान और लोकतंत्र को बचाने’ के नारे को हथियार बनाया तो खटाखट, ठकाठक और फटाफट जैसे जुमले भी खूब चर्चा में रहे। वहीं कुछ चुनाव प्रचार के दौरान कुछ ऐसे बयान भी आए, जिन्हें एनडीए और भाजपा ने जमकर भुनाया।
छत्तीसगढ़ की एक जनसभा में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य भाजपा नेताओं को आरोपों का जवाब देते हुए’अबकी बार, 400 पार’ पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, भाजपा देश का संविधान बदलना चाहती है, इसलिए 400 सीटें जीतना चाहती है। कांग्रेस के नौकरी देने के वादे और युवाओं व महिलाओं के खाते में पैसे ट्रांसफर करने के संकल्प पर कहा, ‘वह खातों में पैसा चुटकी बजाते डालेंगे- खटाखट…खटाखट।’
ओवैसी के 15 मिनट बनाम 15 सेकंड की मांग
महाराष्ट्र की अमरावती लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार नवनीत राणा ने एआईएमएआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और उनके भाई अकबरुद्दीन को घेरते हुए कहा था, ‘छोटा बोलता है कि पुलिस को 15 मिनट के लिए हटाओ तो दिखाएंगे कि हम क्या कर सकते हैं। मैं कहती हूं कि 15 मिनट लगाओगे पर हमको सिर्फ 15 सेकंड लगेंगे। उन्होंने कहा कि अगर 15 सेकंड पुलिस को हटाया तो छोटे और बड़े को यह पता नहीं लगेगा, कहां से आए और कहां गए।
इंडिया ओवरसीज कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और गांधी परिवार के करीबी सैम पित्रोदा के कुछ बयान ऐसे रहे, जिन्होंने कांग्रेस के लिए ही मुश्किलें खड़ीं कर दीं और पार्टी को उस पर सफाई भी देनी पड़ी। हालात ऐसे बने कि उन्हें कांग्रेस ओवरसीज अध्यक्ष पद से इस्तीफा भी देना पड़ा। पहला मौका तब आया जब उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान एक इंटरव्यू में विरासत टैक्स को लेकर वकालत की थी। पीएम मोदी समेत भाजपा के कई नेताओं ने इसे मुद्दा बनाया। इसके बाद कांग्रेस ने इस बयान से किनारा कर लिया और इसे सैम पित्रोदा का निजी विचार बताया।
सैम पित्रोदा ने कहा था कि अमेरिका में विरासत कर लगता है। अगर किसी के पास 100 मिलियन डॉलर की संपत्ति है और जब वह मर जाता है तो वह केवल 45 फीसदी अपने बच्चों को ट्रांसफर कर सकता है, 55 फीसदी सरकार द्वारा हड़प लिया जाता है। यह एक दिलचस्प कानून है। यह कहता है कि आपने अपनी पीढ़ी में संपत्ति बनाई और अब आप जा रहे हैं, आपको अपनी संपत्ति जनता के लिए छोड़नी चाहिए- पूरी नहीं, आधी। ये जो निष्पक्ष कानून है मुझे अच्छा लगता है।
पित्रोदा के विरासत कर वाले बयान से लगी चिंगारी शांत भी नहीं हुई थी कि एक दूसरे बयान से उन्होंने विवाद खड़ा कर दिया था। उन्होंने भारतीयों पर नस्लीय टिप्पणी करते हुए रंगभेद को लेकर एक बयान दिया था, जिसमे उन्होंने कहा कि हम भारत जैसे विविधता वाले देश को एक साथ रख सकते हैं, जहां ईस्ट के लोग चाइनीज जैसे, वेस्ट के लोग अरेबिनय जैसे, नॉर्थ के लोग गोरे जैसे और साउथ के लोग अफ्रीकन जैसे दिखते हैं। उनके इस बयान पर काफी हंगामा हुआ और अंतत: कांग्रेस ने उनसे ओवरसीज अध्यक्ष के पद से इस्तीफा ले लिया।
चुनाव में क्या रहे विपक्ष के मुद्दे
इसके अलावा और भी कई ऐसे मुद्दे रहे, जिन्हें विपक्ष ने प्रमुखता से अपने चुनावी अभियान में उठाया। इनमें जातिगत जनगणना, आर्थिक सर्वे, महंगाई, नौकरी की कमी, सांप्रदायिकता जैसे कई अन्य मुद्दे शामिल हैं।
