नई दिल्ली:- 293 सीटों के साथ एनडीए लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रहा है। वहीं इंडिया को 234 सीटें आई हैं। इस चुनाव में केंद्र की सत्ताधारी भाजपा को उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में तगड़ा झटका लगा है। उत्तर प्रदेश में भाजपा को महज 33 सीटें आई जबकि विपक्षी दल सपा 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है। इसके अलावा पिछली बार सीटों के लिहाज से राज्य में दूसरे स्थान पर रही बहुजन समाज पार्टी इस बार खाता भी नहीं खोल पाई है
पिछली बार की तुलना में उत्तर प्रदेश के चुनाव नतीजे काफी बदल गए। जहां 2019 में राज्य में बसपा दूसरे स्थान पर थी वहीं इस बार पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल सकी। इन नतीजों के बीच आइये जानते हैं कि बसपा को 80 सीटों पर कहां कितने वोट मिले हैं? कितनी सीटों पर यह हार जीत के अंतर से कम है, कितनी पर ज्यादा? अगर बसपा के वोट भाजपा को ट्रांसफर होते तो क्या होता, अगर बसपा का वोट गठबंधन को ट्रांसफर होता तो क्या होता?
पहले जानते हैं यूपी में लोकसभा चुनाव के नतीजे?
इस लोकसभा चुनाव में यूपी में 37 सीटों के साथ समाजवादी सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के 33 सांसद जीते हैं। तीसरे स्थान पर कांग्रेस ने छह सीटें जीतीं। दो सांसदों के साथ राष्ट्रीय लोक दल चौथे स्थान पर है। इसके अलावा आजाद समाज पार्टी और अपना दल के एक-एक सांसद जीतकर आए हैं।
यूपी में कैसा रहा बसपा का प्रदर्शन?
यूपी में मत प्रतिशत के हिसाब से बसपा चौथे स्थान पर रही। पार्टी को राज्य में 9.29 फीसदी मत मिले हैं। वहीं पिछले चुनाव में सपा के साथ चुनाव लड़ने वाली बसपा को यूपी में 19.4 फीसदी पड़े थे। इस वोट बैंक के कारण पार्टी के 10 सांसद जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। हालांकि, इस बार मत प्रतिशत भी करीब 10 फीसदी घटा है और सीटों का खाता नहीं खुल सका। इस चुनाव में यूपी में 14 सीटें ऐसी रहीं जहां भाजपा को जीत मिली लेकिन जीत का अंतर बसपा को मिले वोटों से कम था। यदि इन सीटों पर बसपा को मिला वोट इंडिया की तरफ चला जाता तो भाजपा ये सीटें हार भी सकती थी। ये सीटें थीं अकबरपुर, अलीगढ़, अमरोहा, बांसगांव, भदोही, देवरिया, फर्रुखाबाद, फतेहपुर सीकरी, हरदोई, मेरठ, मिश्रिख, फूलपुर, शाहजहांपुर और उन्नाव। ऐसा ही कुछ हाल बिजनौर और मिर्जापुर सीटों पर रहा जहां क्रमशः आरएलडी और अपना दल के उम्मीदवार जीते हैं।
