नई दिल्ली :- कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने बुधवार को आम बजट 2024-25 में बिहार और आंध्र प्रदेश को छोड़कर अन्य राज्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और राज्यसभा से बहिर्गमन किया.
हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के इन आरोपों को बेतुका करार दिया, उन्होंने कहा कि बजट भाषण में राज्यों का नाम न लेने का अर्थ यह नहीं है कि उन्हें नजरअंदाज किया गया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के द्वारा पूर्व में पेश किए गए बजट में भी सभी राज्यों का कभी उल्लेख नहीं रहा. वहीं कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने नीट, अग्निवीर योजना को समाप्त करने समेत 5 मांगें रखीं.
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने संघवाद पर हमले को लेकर केंद्र सरकार और विशेष रूप से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘यूपीएससी को राज्य के डीजीपी की नियुक्ति में भूमिका क्यों निभानी पड़ती है? राज्य सरकार को राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति चुनने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए? इस सरकार ने पहले आंध्र प्रदेश के साथ अलग व्यवहार क्यों किया? मुझे इस बात से कोई शिकायत नहीं है कि आप आंध्र प्रदेश और बिहार को राहत दे रहे हैं. बाकी राज्यों का क्या? उन्होंने कहा कि हम एक संघीय देश हैं. लेकिन यह संघवाद के लिए मौत की घंटी है… आप एक राज्य नहीं चुन सकते और दूसरे राज्य को राहत देने से मना नहीं कर सकते. उन्होंने सीतारमण से यह भी पूछा कि उन्होंने अपने पूरे बजट भाषण में तमिलनाडु या तमिल शब्द का जिक्र क्यों नहीं किया. उन्होंने पांच मांगें भी गिनाईं और वित्त मंत्री से जवाब मांगा.
चिदंबरम ने कहा कि मेरी 5 मांगें हैं, जिनके लिए मैं वित्त मंत्री से आग्रह करूंगा कि वे हमारे घोषणापत्र से कुछ मांगें लें.
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कानूनी रूप से गारंटीकृत एमएसपी.
मार्च 2024 तक दिए गए शिक्षा ऋण की किस्त के लिए बकाया ब्याज की राशि को माफ किया जाएगा.
अग्निपथ/अग्निवीर योजना का उन्मूलन
NEET को खत्म कर दिया जाना चाहिए, कुछ राज्य ऐसा चाहते हैं, उन्हें ऐसा करने दिया जाए और अन्य राज्यों को इससे छूट दी जाए