नई दिल्ली:- सोशल मीडिया पर कई बीमारियों के इलाज को लेकर बड़े दावे किए जाते हैं, जो लोगों के लिए खतरनाक हो सकते हैं. इन दिनों अमेरिका समेत कई यूरोपीय देशों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक पर कई रील्स वायरल हो रही हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि आंखों में शहद या हनी ड्रॉप्स डालने से फ्लोटर्स, ड्राइनेस और आंखों के इंफेक्शन से राहत मिल सकती है. भारत में भी सोशल साइट्स पर इस तरह की चीजें वायरल होती रहती हैं. अब सवाल है कि क्या वाकई शहद और इससे बने आई ड्रॉप्स आंखों के लिए फायदेमंद होते हैं? एक्सपर्ट से जान लेते हैं.
आंखों की ड्राइनेस, फ्लोटर्स या अन्य किसी भी परेशानी में लोगों को शहद या हनी ड्रॉप्स का इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जाती है. आंखों की परेशानियों के लिए अलग-अलग आई ड्रॉप्स होते हैं, जो मरीज की कंडीशन के आधार पर सजेस्ट किए जाते हैं.
एक्सपर्ट की मानें तो लोगों को अपनी मर्जी से किसी भी तरह के आई ड्रॉप का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. गलत ड्रॉप डालने से आंखों की समस्याएं बढ़ सकती हैं और इंफेक्शन फैल सकता है. खाने वाले शहद को आंखों में डालना खतरनाक हो सकता है. इससे आंखों में इंफेक्शन समेत कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं. आंखों के ड्रॉप्स बनाते समय उन्हें कई बार स्टेराइल किया जाता है, ताकि इंफेक्शन पैदा न हो.
डॉक्टर तुषार ने बताया कि आंखों में फ्लोटर्स दिखने की कई वजह होती हैं और अधिकतर मामलों में फ्लोटर्स से कोई नुकसान नहीं होता है. फ्लोटर्स के लिए कोई आई ड्रॉप नहीं होता है और कुछ कंडीशंस में फ्लोटर्स के लिए लेजर या अन्य सर्जिकल प्रोसीजर का सहारा लिया जाता है. हालांकि ऐसा केवल रेयर मामलों में ही करने की सिफारिश की जाती है.
ड्राइनेस के लिए भी लोगों को एक्सपर्ट द्वारा बताए गए लुब्रिकेंट ड्रॉप्स का इस्तेमाल करना चाहिए. हनी ड्रॉप्स को कुछ लिमिटेड स्टडीज में ड्राइनेस के लिए फायदेमंद माना गया है, लेकिन इसे ट्रीटमेंट के तौर पर इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जाती है. लोगों को आंखों को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए, वरना आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है और आंखें खराब हो सकती हैं
