नई दिल्ली:– हरियाली तीज के एक महीने के बाद ‘हरतालिका तीज’ का पावन व्रत रखा जाता है। जो इस साल 6 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। चाहे वह हरियाली तीज हो या हरतालिका। दोनों व्रत पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए ही रखा जाता है।
हिन्दू धर्म में तीज व्रत का बड़ा महत्व है। चाहे वह हरियाली तीज हो या हरतालिका। दोनों व्रत ही व्रत पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए ही रखा किया जाता है। आपको बता दें, हरियाली तीज के एक महीने के बाद ‘हरतालिका तीज’ का पावन व्रत रखा जाता है। जो इस साल 6 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
क्यों खास होता हैं यह व्रत
हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को ‘हरतालिका तीज’ का व्रत रखा जाता है। इस व्रत के कुछ जरूरी नियम होते हैं, इसके तहत कुछ खास चीजों का होना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इसके बिना पूजा अधूरी रह जाती है।अगर आप भी हरतालिका तीज व्रत रखते हैं, तो इन पूजा सामग्रियों से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा अवश्य करें। ऐसा करने से आपको शुभ फल की प्राप्ति होगी। इसके साथ ही आपकी सारी इच्छाएं पूरी हो जाएगी। आइए जानें हरतालिका तीज व्रत की पूजन सामग्री के बारे में।
हरतालिका तीज व्रत पूजा सामग्री
ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, इस व्रत में उपयोग किए जाने वाले पूजा सामग्री निम्न हैं। जो इस प्रकार हैं।
सूखा नारियल
कलश
बेलपत्र
शमी का पत्ता
केले का पत्ता
धतूरे का फल
घी
शहद
गुलाल
चंदन
मंजरी
कलावा
इत्र
पांच फल
सुपारी
अक्षत
धूप
दीप
कपूर
गंगाजल
दूर्वा
जनेऊ
सुहाग सामग्री
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पार्वती माता भगवान शिव को पाने के लिए हरतालिका तीज के दिन व्रत किया था। इस दिन उन्होंने व्रत में कई तरह के सुहाग सामग्रियों का उपयोग किया था। जिसकी अपनी अगल महत्व है।
बिंदी
सिंदूर
कुमकुम
मेहंदी
बिछिया
काजल
चूड़ी
कंघी
महावर आदि
व्रत के क्या है नियम
हरतालिका तीज का व्रत निर्जला रखा जाता है। इसके प्रत्येक पहर में भगवान शंकर की पूजा और आरती की जाती है। इस दिन घी, दही, शक्कर, दूध, शहद का पंचामृत चढ़ाया जाता है। हरतालिका तीज के दिन सुहागिन महिलाओं को सिंदूर, मेहंदी, बिंदी, चूड़ी, काजल सहित सुहाग पिटारा दिया जाता है।
इस दिन विवाहित महिलाओं के व्रत रखने से उनके पति की आयु लंबी होती है। ऐसा करने पर उनके दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है।
पूजा विधि
हरतालिका तीज की पूजा के लिए सबसे पहले लाल कपड़ा बिछाएं।
इसके बाद उस पर शिव जी की मूर्ति या फोटो रखें।
भगवान के अभिषेक करने के लिए एक परात रख लें।
फिर सफेद चावल से अष्टकमल बनाएं और उसपर दीप कलश स्थापित करें।
अब कलश के ऊपर स्वास्तिक बनाएं और कलश में जल भरकर सुपारी, सिक्का और हल्दी उसमें डाल दें।
कलश के ऊपर पान के 5 पत्तों को रखें साथ ही चावल भरी कटोरी व एक दीप भी कलश के ऊपर रख दें।
इसके बाद पान के पत्ते के ऊपर चावल रखें, और उस पर गौरा जी व गणेश जी को स्थापित करें।
भगवान को टीका लगाएं और शिव पार्वती का ध्यान करें और मंत्र पढ़े।
अब परात में शिवलिंग को रखकर पंचामृत से अभिषेक करें।
अब चंदन अर्पित करें, धूप, फूल, दीप, पान के पत्ते, शमीपत्री, बेलपत्र, 16 तरह की पत्तियां, फल, मिठाई और मेवे आदि चढ़ा दें।
फिर हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनें और पढ़ें, आखिर में आरती करके पूजा को संपन्न करें।
