नई दिल्ली:- जिंदगी में समय का सबसे ज्यादा महत्व है. अगर वक्त अच्छा है तो कोई भी राजा बन सकता है और अगर खराब हो तो रंक होते देर नहीं लगती. सनातन धर्म में खराब समय से निकलने और अच्छा समय लाने के कई वास्तु उपाय बताए गए हैं. इन्हीं में से एक दीवार घड़ी से जुड़ा वास्तु उपाय भी है. वास्तुविदों के मुताबिक घर में किसी भी दीवार पर घड़ी टांग देना सही तरीका नहीं है. एक दिशा ऐसी है, जिसकी ओर भूलकर भी घड़ी नहीं टांगनी चाहिए वरना बुरे दिन शुरू होते देर नहीं लगती. वह कौन सी दिशा है, इसके बारे में आज हम विस्तार से बताते हैं.
वास्तु शास्त्र के अनुसार धन के देवता कुबेर उत्तर दिशा में शासन करते हैं. वहीं देवताओं के राजा पूर्व दिशा में विद्यमान रहते हैं. इस वजह से इन दोनों दिशाओं को बेहद शुभ माना जाता है. कहते हैं कि इन दोनों दिशाओं में दीवार घड़ी टांगने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और अटके हुए काम अपने आप सफल होने शुरू हो जाते हैं. दीवार घड़ी के इस उपाय से न केवल परिवार में आपसी स्नेह बढ़ता है बल्कि धन का प्रवाह भी बढ़ जाता है.
क्या पश्चिम दिशा में टांग सकते हैं दीवार घड़ी?
अगर किसी घर में पूर्व या उत्तर दिशा में घड़ी टांगने के लिए उचित स्थान उपलब्ध नहीं है तो क्या पश्चिम दिशा में भी घड़ी टांगी जा सकती है? वास्तुविदों के मुताबिक, पूर्व और उत्तर दिशा की तरह पश्चिम ज्यादा शुभ तो नहीं होती लेकिन वहां पर घड़ी टांगने से कोई नुकसान भी नहीं होता. ऐसे में आप वहां घड़ी टांग सकते हैं. ऐसा करने से परिवार पर कोई परेशानी नहीं आएगी.
किस दिशा में दीवार घड़ी नहीं लगानी चाहिए?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिण दिशा मृत्यु के देवता यमराज की मानी जाती है. यह एक अशुभ दिशा मानी जाती है. लिहाजा दीवार घड़ी को भूलकर भी दक्षिण दिशा की ओर मुख करके नहीं टांगना चाहिए. इस दिशा में घड़ी टांगने का अर्थ ये होता है कि यमराज से मिलन का वक्त नजदीक आ रहा है. ऐसा करने से घर में बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ जाता है और आर्थिक तंगी पूरे परिवार को घेर लेती है. लिहाजा जहां तक संभव हो, इस दिशा में घड़ी टांगने से बचना चाहिए.
