नई दिल्ली:- महिलाओं में बच्चेदानी का खिसकना, जिसे मेडिकल भाषा में “पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स” कहा जाता है, एक आम समस्या है. हालांकि अक्सर ये सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है. आज हम अपने लेख में डॉ. आस्था दयाल से जानेंगे इसके पीछे की वजह.
डॉ. आस्था दयाल यह तब होता है जब बच्चेदानी अपनी सही जगह से खिसककर योनि में आ जाती है. यह समस्या विशेष रूप से उन महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है जिन्होंने कई बच्चों को जन्म दिया हो, जिनकी उम्र बढ़ रही हो या जिन्होंने भारी वजन उठाने जैसे काम किए हों.
1.डिलीवरी : बार-बार डिलीवरी या लंबे समय तक चले डिलीवरी के कारण बच्चेदानी की मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है, जिससे वह खिसक सकती है.
- मोटापा: अधिक वजन होने के कारण पेट पर ज़्यादा दबाव पड़ता है, जो बच्चेदानी के खिसकाने का कारण बनता है.
- बढ़ती उम्र: उम्र के साथ मसल्स की शक्ति कम हो जाती है, जिससे बच्चेदानी के खिसकने का खतरा बढ़ जाता है.
- हार्मोनल चेंजेस : मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, जिससे मसल्स की ताकत कम हो सकती है.
- भारी सामान उठाना: बार-बार भारी सामान उठाने से भी पेल्विक मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे यूट्रस खिसक सकता है.
- लक्षण-
नीचे की ओर खिंचाव: महिलाएं पेट के नीचे खिंचाव या दबाव महसूस कर सकती हैं.
पेशाब में दिक्कत: बार-बार पेशाब आने की इच्छा या पेशाब करते समय दर्द हो सकता है.
कमर दर्द: खिसकने के कारण कमर में दर्द हो सकता है
सेक्सुअल संबंधों के दौरान दर्द: सेक्सुअल संबंध बनाते समय दर्द महसूस हो सकता है.
योनि में उभार: कुछ महिलाओं को योनि के अंदर उभार जैसा महसूस हो सकता है, जो उनके चलने-फिरने में असुविधा पैदा कर सकता है.
बच्चेदानी के खिसकने का असर महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है. यह समस्या न केवल दर्द और असुविधा का कारण बनती है, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान और जीवन की क्वालिटी पर भी नेगेटिव इफ़ेक्ट डाल सकती है. खिसकने के गंभीर मामलों में महिलाओं को चलने-फिरने, बैठने और रोज़ के कामो में कठिनाई हो सकती है. इसके अलावा, यह समस्या सेक्सुअल जीवन को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है.
प्रिवेंशन टिप्स –
नियमित व्यायाम: पेल्विक मसल्स को मजबूत बनाने के लिए एक्सरसाइज करना फायदेमंद हो सकता है.
संतुलित आहार: वजन को कंट्रोल रखने के लिए संतुलित आहार लेना चाहिए.
भारी वजन उठाने से बचें: यदि संभव हो तो भारी वजन उठाने से बचें.
डिलीवरी के बाद विशेष ध्यान: डिलीवरी के बाद महिलाओं को अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार एक्सरसाइज करना चाहिए.
