
मुंबई। मुंबई की अदालत ने देह व्यापार में लिप्त एचआईवी संक्रमित महिला की दो साल की हिरासत को बरकरार रखा। अदालत ने निर्देश देते हुए कहा कि अगर उसकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उसे रिहा किया जाता है तो उससे ‘समाज के लिए खतरा’ होने की संभावना है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसयू बघेले ने कहा कि महिला को सुधार गृह में देखभाल और सुरक्षा मिलेगी। इससे उसे आवश्यक ब्रेनवॉश के बाद सामान्य जीवन जीने में मदद मिलेगी। अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 की धारा 17(4) के तहत एक मजिस्ट्रेट द्वारा पीड़िता को आश्रय गृह में दो साल के लिए कस्टडी में रखने का आदेश दिए जाने के बाद महिला के पिता ने अपील में सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
पिता के वकील ने कहा कि महिला को गलतफहमी और उसकी एचआईवी पॉजिटिव स्थिति के कारण गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा, उनकी बेटी एक अभिनेत्री है और वह खुद एक पुलिस अधिकारी हैं। परिवार आर्थिक रूप से मजबूत है और वे उसका भरण-पोषण कर सकते हैं। अभियोजक ने आवेदन का विरोध किया और कहा कि महिला को रंगेहाथ पकड़ा गया था। उसे सुधार गृह में वोकेशनल ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था। वह एचआईवी संक्रमित थी। अदालत ने महिला के पिता की इस दलील को खारिज कर दिया कि चूंकि वह एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखती है तो वह अनैतिक गतिविधियों में शामिल नहीं होगी।