नई दिल्ली :– काला नमक घर की रसोई का एक खास मसाला है. इस नमक का इस्तेमाल पकवान बनाने में भी किया जाता रहा है. काला नमक पारंपरिक चिकित्सा में भी उपयोग में लिया जाता रहा है. भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक अनुष्ठानों, त्योहारों में भी इस नमक का खास महत्व है.
इसका रंग भूरा- काला होता है और इसका स्वाद हल्का मीठा और सल्फर जैसा होता है. इसका उपयोग भारतीय और अन्य एशियाई व्यंजनों में खासकर चटनी, चाट, और सलाद में किया जाता है,
इस तरह बनता है काला नमक
काला नमक बनाना आसान काम नहीं है, इसमें काफी मेहनत और धैर्य की जरूरत होती है. सबसे पहले भट्टी में जोरदार आग जलाई जाती है, जिसमें खूब सारा कोयला डाला जाता है. इसके बाद मटकों को भट्टी में क्रम से रखा जाता है, ताकि कोई जगह खाली न रहे. मटकों में सफेद नमक भरा जाता है, और साथ ही बादाम के छिलके डाले जाते हैं. इन छिलकों से नमक का रंग बदलकर काला हो जाता है, जिससे इसे “काला नमक” कहा जाता है. फिर मटको को ईटों से ढक देते हैं और 24 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है. आग के गोले बन चुके मटको को भट्टी से बाहर निकाल लिया जाता है और ठंडा होने पर तोड़ कर काला नमक बाहर निकाल लिया जाता है.
काला नमक खाने के कई फायदे हैं
पाचन में सुधार और हाइड्रेशन: यह पाचन तंत्र को संतुलित करने में मदद करता है और पेट की समस्याओं को कम करता है और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करता है, जो हाइड्रेशन के लिए जरूरी है.वजन नियंत्रण और आंखों के लिए: काला नमक पाचन क्रिया को बढ़ावा देता है, जिससे वजन नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा इसमें मौजूद खनिज तत्व आंखों की सेहत में सुधार कर सकते हैं.सांसों की दुर्गंध: यह मुंह की दुर्गंध को कम करने में मदद कर सकता है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है. यह गले में खराश और सर्दी-खांसी में आराम देता है.
